चंडीगढ़: पलवल के पुलिस प्रमुख और एक अन्य अधिकारी मंगलवार को उस समय बाल-बाल बच गए जब कुछ आंदोलनकारी किसानों ने दिल्ली की ओर बढ़ते हुए अवरोधकों को तोड़ने का प्रयास किया और अपने वाहनों को खतरनाक तरीके से चलाया.Also Read - Netaji Subhash Chandra Bose की प्रतिमा के होलोग्राम का PM Modi आज करेंगे अनावरण, जानें क्या होगा खास

पलवल पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ किसानों ने आगरा-मथुरा-दिल्ली राजमार्ग पर खतरनाक तरीके से अपने ट्रैक्टर चलाए जिससे ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों की जान के लिए खतरा पैदा हो गया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की. इस दौरान एसपी भी पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद थे. Also Read - शादी के कार्ड पर किसान आंदोलन की झलक, दूल्हे ने लिखवाया- जंग अभी जारी है, MSP की बारी है

पुलिस ने बताया कि आंदोलनकारी किसान पलवल-फरीदाबाद सीमा पर गैर-निर्धारित मार्ग से दिल्ली की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसानों की ट्रैक्टर परेड के लिए एक अलग रास्ता निर्धारित किया गया था, लेकिन वे उस पर कायम नहीं रहे और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. Also Read - हरियाणा: कक्षा 5वीं और 8वीं के लिए भी होंगी बोर्ड परीक्षाएं, श‍िक्षा मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन

पलवल के पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत ने बताया कि इस घटना में कुछ किसान घायल हुए हैं. कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.

पलवल के पुलिस अधीक्षक ने कहा, “हम उन्हें (किसानों को) पूर्व-निर्धारित मार्ग का उपयोग करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनमें से कुछ हिंसक हो गए. करीब 4-5 ट्रैक्टर खतरनाक तरीके से हमारी ओर बढ़े और मैंने तथा एक अन्य अधिकारी ने किसी तरह जान बचाई.” उन्होंने कहा कि उसके बाद पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बल प्रयोग करने का फैसला किया.

गहलावत ने कहा कि ट्रैक्टर परेड से ठीक पहले पलवल पुलिस ने किसानों के समूह के साथ संवाद किया था. उन्होंने कहा, “हमने उन्हें केजीपी एक्सप्रेसवे पर 60 किलोमीटर खंड का उपयोग करने का विकल्प दिया था और कहा था कि वे फरीदाबाद के सेक्टर 58 से दाएं मुड़ने के बाद इस मार्ग का उपयोग कर सकते हैं. लेकिन वे दिल्ली की ओर जाने वाले दूसरे मार्ग का उपयोग करने पर अड़े थे, जिसे हमने अस्वीकार कर दिया था.”

इस बीच, पलवल और फरीदाबाद जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दोनों राष्ट्रीय राजधानी के करीब हैं. फरीदाबाद में निषेधाज्ञा जारी की गई है, जिसके तहत किसी एक स्थान पर पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों के जमा होने पर रोक है.