प्रयागराज: अचानक दिल का दौरा पड़ने पर सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) की जीवन रक्षक प्रक्रिया मरीज की जिंदगी बचा सकती है. सीपीआर प्रक्रिया के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए इंडिया मेडट्रानिक ने यहां कुंभ मेले में ‘चिरंजीव हृदय: सीपीआर सीखो, दिल धड़कने दो’ अभियान शुरू किया है.

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यहां सेक्टर-6 स्थित नेत्रकुंभ में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए आरएमएल इंस्टीट्यूट आफ मे़डिकल साइंसेज, लखनऊ के डाक्टर मुकुल मिश्रा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य लोगों को हृदय गति रुकने की स्थिति में हाथों से सीपीआर में प्रशिक्षित करना है. हमने 10,000 लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है. उन्होंने बताया कि अचानक दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में यदि तुरंत इलाज न किया जाए तो व्यक्ति की जान जा सकती है. सीपीआर एक मरीज की धड़कन को फिर से शुरू करने में मदद करने के लिए एक तकनीक है. हाथों से सीपीआर को तुरंत शुरू किया जा सकता है. इसमें मरीज की छाती के केंद्र में लगभग 2-2.4 इंच की गहराई में तेज धक्का देने की आवश्यकता होती है. ये क्रियाएं जितनी जल्दी हो सके लागू करना जरूरी है.

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क्या करेंगे आप
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत, नई दिल्ली के डॉ. विवेका कुमार ने कहा कि अगर आपके पास बैठा व्यक्ति जमीन पर गिर जाए और सांस लेना बंद कर दे, तो आप क्या करेंगे? यह जानना लाजिमी है कि हृदय संबंधी आपात स्थिति में क्या करना चाहिए और मदद के लिए क्या कदम बढ़ाना चाहिए. उन्होंने बताया कि भारत में कोई स्पष्ट डेटा उपलब्ध नहीं है; लेकिन अध्ययनों के माध्यम से, यह अनुमान लगाया जाता है कि अचानक दिल का दौरा अनुभव करने वाले 95% लोग मर जाते हैं, क्योंकि उन्हें छह मिनट तक कोई जीवन रक्षक चिकित्सा नहीं मिलती है.

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