नई दिल्ली: महिलाओं के चेहरे पर मुंहासे और बाल वर्तमान में एक आम समस्या बन गए हैं इससे उनमें समाज में शर्म की स्थिति झेलने के साथ-साथ भावनात्मक तनाव और अवसाद की चपेट में आने का खतरा रहता है. इस समस्या को पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिन्ड्रोम (पीसीओएस) कहा जाता है, जिसका जल्दी ही उचित उपचार मिलने से भावनात्मक तनाव कम हो सकता है. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिन्ड्रोम वास्तव में एक मेटाबोलिक, हार्मोनल और साइकोसोशल बीमारी है, जिसका प्रबंधन किया जा सकता है, लेकिन ध्यान नहीं दिये जाने से रोगी के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. Also Read - Kumbh 2021: कुंभ के मुख्य पर्वों पर हरिद्वार आने वाली महिलाओं को मिलेगी निशुल्क यात्रा की सुविधा

Also Read - International Women's Day: ताजमहल का फ्री में दीदार कर सकेंगी महिलाएं, फोरनर्स को भी नहीं लेना होगा टिकट

Health Alert: पेट की अतिरिक्त चर्बी Brain को पहुंचा सकती है नुकसान Also Read - Tv Actress Subuhii Joshii ने कहा कुछ भी कर लो, कितना भी दुखी हो लो... लेकिन ये काम मत करो

एक अध्यनन के मुताबिक, भारत में पांच में से एक वयस्क महिला और पांच में से दो किशोरी पीसीओएस से पीड़ित है. मुंहासे और हिरसुटिज्म पीसीओएस के सबसे बुरे लक्षण हैं. पीसीओएस का प्रमुख लक्षण है हाइपरएंड्रोजेनिज्म, जिसका मतलब है महिला शरीर में एंड्रोजन्स (पुरुष सेक्स हॉर्मोन, जैसे टेस्टोस्टेरोन) की उच्च मात्रा. इस स्थिति में महिला के चेहरे पर बाल आ जाते हैं. दिल्ली में ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी की निदेशक व दिल्ली गायनेकोलॉजिस्ट फोरम (दक्षिण) की अध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी आहूजा ने कहा कि त्वचा की स्थितियों, जैसे मुंहासे और चेहरे पर बाल को आम तौर पर कॉस्मेटिक समस्या समझा जाता है. महिलाओं को पता होना चाहिए कि यह पीसीओएस के लक्षण है और हॉर्मोनल असंतुलन तथा इंसुलिन प्रतिरोधकता जैसे कारणों के उपचार हेतु चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.

Health Alert: जानें क्या है ‘विंटर ब्लू’, सर्दियों में क्यों बढ़ते हैं लोगों में Depression के लक्षण

पीसीओएस एक चुनौतीपूर्ण सिन्ड्रोम

मुंहासे और हिरसुटिज्म के उपचार के बारे में डॉ. मीनाक्षी आहूजा ने कहा कि पीसीओएस एक चुनौतीपूर्ण सिन्ड्रोम है, लेकिन जोखिमों का प्रबंधन करने के पर्याप्त अवसर हैं. पीसीओएस के बारे में बेहतर जागरूकता की आवश्यकता है, ताकि महिलाएं लक्षणों को पहचानें और सही समय पर सही मेडिकल सहायता लें. उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली, पोषक आहार, पर्याप्त व्यायाम और उपयुक्त उपचार अपनाने से पीसीओएस के लक्षण नियंत्रित हो सकते हैं. पीसीओएस के कारण होने वाला हॉर्मोनल असंतुलन उपचार योग्य होता है, ताकि मुंहासे और हिरसुटिज्म को रोका जा सके. गायनेकोलॉजिस्ट से उपयुक्त मेडिकल मार्गदर्शन प्रभावी उपचार के लिए महत्वपूर्ण है.

Health Tips: ठंड के मौसम में इन उपायों को अपनाकर रहें स्वस्थ

पांच से आठ प्रतिशत महिलाएं हिरसुटिज्म से पीड़ित

देश में पांच से आठ प्रतिशत महिलाएं हिरसुटिज्म से पीड़ित हैं. हार्मोन के असंतुलन के कारण मुंहासे भी होते हैं और यह पीसीओएस का लक्षण है. यह दोनों लक्षण महिला की शारीरिक दिखावट को प्रभावित करते हैं और इनका उपचार न होने से महिला का आत्मविश्वास टूट जाता है और उनका अपने प्रति आदर कम होता है. मुंहासे से पीड़ित 18 प्रतिशत रोगियों में गंभीर डिप्रेशन और 44 प्रतिशत में एन्ग्जाइटी देखी गई है.

Health Alert: कैल्शियम के कण दे सकते हैं दिल के रोग का संकेत

समय पर नहीं कराया उपचार तो खराब हो सकती स्किन

डॉ. आहूजा ने कहा कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं की भलाई सुनिश्चित करने के लिए समाज और परिवारों को साइकोलॉजिकल तनाव को समझने और साथ ही पूरे आत्मविश्वास के साथ दुनिया का सामना करने के लिए उन्हें सहयोग देने के लिए प्रयास करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अधिकांश महिलाओं को इन स्थितियों का बोध नहीं है और वे चिकित्सकीय मार्गदर्शन के बिना सामयिक उपचार लेती हैं, जिससे त्वचा खराब हो सकती है. यह जानना महत्वपूर्ण है कि अगर आप लक्षणों का उपचार नहीं करेंगे, तो मुंहासे और चेहरे पर बाल दोबारा आ जाएंगे.

लाइफस्टाइल की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.