हाल के महीनों में किए गए अध्ययन में पता चला है कि खांसी होने पर कफ की एक बूंद हवा में 2 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से 6.6 मीटर तक की यात्रा कर सकती है. बल्कि हवा सूखी होने पर इससे भी ज्यादा दूरी तक यात्रा कर सकती है.Also Read - महिलाओंं की 6 कॉमन हेल्‍थ प्रॉब्‍लम्‍स, जानें आपके साथ हो तो क्‍या करें?

सिंगापुर के शोधकर्ताओं ने वायरल ट्रांसमिशन को समझने के लिए द्रव भौतिकी के महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया. ‘फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स’ नाम के जर्नल में प्रकाशित पेपर में छोटी सी बूंद के फैलाव पर सिमुलेशन के जरिए अध्ययन किया. Also Read - इंदौर में स्वाइन फ्लू से दो महीने में 18 लोगों की मौत, जानिए इसके लक्षण व बचाव

अध्ययन के लेखक फोंग येव लियोंग ने कहा, “मास्क पहनने के अलावा, हमने सोशल डिस्टेंसिंग को प्रभावी पाया है क्योंकि खांसी के दौरान व्यक्ति के मुंह से निकली छोटी बूंद का असर कम से कम एक मीटर की दूरी पर खड़े व्यक्ति पर कम होता है.” Also Read - राजस्थान में स्वाइन फ्लू से 36 मौतें, जानिए इसके लक्षण और बचाव का तरीका

एक बार के खांसने पर बड़ी सीमा में हजारों बूंदों का उत्सर्जन होता है. वैज्ञानिकों को गुरुत्वाकर्षण बल के कारण जमीन पर बड़ी-बड़ी बूंदें पड़ी मिलीं, लेकिन खांसने पर बिना हवा के भी बूंदें एक मीटर तक गईं.

दरअसल, मध्यम आकार की बूंदें छोटी बूंदों में वाष्पित हो सकती हैं, जो हल्की होने के कारण आसानी से और आगे की यात्रा करती हैं.

लेखक ने कहा, “वाष्पीकृत होने वाली छोटी बूंद में गैर-वाष्पशील वायरल सामग्री होती है इससे वायरल के फैलने का खतरा प्रभावी रूप से बढ़ जाता है. यह वाष्पित बूंदें एरोसोल बन जाती हैं और वे फेफड़ों में गहराई से प्रवेश करने को लेकर अधिक संवेदनशील होती हैं.”
(एजेंसी से इनपुट)