Artificial Intelligence: अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरण बनाया है, जो यह अनुमान लगा सकता है कि एक कोविड-19 मरीज को कितनी अतिरिक्त ऑक्सीजन की आवश्यकता हो सकती है.Also Read - कोरोना से बड़ी राहत: Lockdown-Unlock में भी घटे केसेज, 214 दिनों में मिले सबसे कम नए मरीज

एनवीआईडीआईएए के सहयोग से दुनिया भर में 20 से अधिक अस्पतालों (एआई प्रौद्योगिकी में अग्रणी) ने पांच महाद्वीपों के डेटा का उपयोग करके एक नई एआई-आधारित तकनीक का परीक्षण किया, जिसे फेडरेटेड लनिर्ंग के रूप में जाना जाता है. Also Read - भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बाजार 2025 तक 7.8 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा

यह तकनीक कोविड के लक्षणों वाले अस्पताल के मरीजों के छाती के एक्स-रे और इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण करने के लिए एल्गोरिथ्म का उपयोग करती है. Also Read - CoronaVirus Third Wave: ICMR ने दी चेतावनी, लापरवाही की तो फिर लग जाएगा सख्त लॉकडाउन

नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित परिणामों से पता चलता है कि यह 95 प्रतिशत की संवेदनशीलता और 88 प्रतिशत से अधिक की विशिष्टता के साथ आपातकालीन विभाग में एक मरीज के आने के 24 घंटों के भीतर आवश्यक ऑक्सीजन की भविष्यवाणी करता है.

सख्त रोगी गोपनीयता बनाए रखने के लिए, रोगी डेटा को पूरी तरह से गुमनाम कर दिया गया था और प्रत्येक अस्पताल को एक एल्गोरिथ्म भेजा गया था ताकि कोई डेटा साझा न किया जाए या उसका स्थान न छोड़ा जाए.

अमेरिका में मास जनरल बिंघम से डॉ इत्तई दयान ने कहा, ‘आमतौर पर एआई विकास में, जब आप एक अस्पताल के डेटा पर एक एल्गोरिथ्म बनाते हैं, तो यह किसी अन्य अस्पताल में अच्छी तरह से काम नहीं करता है. विभिन्न महाद्वीपों से फेडरेटेड लर्निंग और उद्देश्य, मल्टीमॉडल डेटा का उपयोग करके परीक्षा मॉडल विकसित करके, हम यह बनाने में सक्षम थे. सामान्यीकृत मॉडल जो दुनिया भर में फ्रंटलाइन चिकित्सकों की मदद कर सकता है, जहां परीक्षा एल्गोरिथ्म विकसित किया गया था’.

अध्ययन में दुनिया भर के लगभग 10,000 कोविड रोगियों के परिणामों का विश्लेषण किया गया.

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर फियोना गिल्बर्ट ने कहा, फेडरेटेड लनिर्ंग में एआई नवाचार को कार्यप्रवाह में लाने के लिए परिवर्तनकारी शक्ति है.

एनवीआईडीआईए में मेडिकल एआई के ग्लोबल हेड जी फ्लोर्स मोना ने कहा, ‘फेडरेटेड लर्निंग शोधकतार्ओं को एआई की शक्ति का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर जो कुछ भी कर सकता है. उसके लिए एक नया मानक स्थापित करने और सहयोग करने की अनुमति देता है. यह एआई को न केवल स्वास्थ्य देखभाल के लिए बल्कि सभी उद्योगों में गोपनीयता का त्याग किए बिना मजबूत मॉडल बनाने की तलाश में आगे बढ़ेगा’.
(एजेंसी से इनपुट)