चमत्कारी गुणों वाला है बगीचे में उगने वाला ये पौधा, दही से 9 गुना ज्यादा प्रोटीन और दूध से 17 गुना ज्यादा कैल्शियम सिर्फ 100 ग्राम पत्ती में

Moringa benefits: सहजन की 100 ग्राम पत्तियों से दही से 9 गुना ज्यादा प्रोटीन, संतरे से 7 गुना ज्यादा विटामिन सी, गाजर से 4 गुना ज्यादा विटामिन ए, केले से 15 गुना ज्यादा पोटैशियम, पालक से 25 गुना ज्यादा आयरन, दूध से 17 गुना ज्यादा कैल्शियम मिलता है.

Published date india.com Published: January 24, 2025 2:54 PM IST
चमत्कारी गुणों वाला है बगीचे में उगने वाला ये पौधा, दही से 9 गुना ज्यादा प्रोटीन और दूध से 17 गुना ज्यादा कैल्शियम सिर्फ 100 ग्राम पत्ती में

Benefits Of Eating Drumstick: ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की चुनौती से निपटना आज की तारीख में सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आपके घर के बगीचे में आसानी से उगने वाला एक पौधा इतना चमत्कारी है कि पोषण की कमी से होने वाली कई बीमारियों से एक साथ निपटने में सहायक है. बगीचे में उगने वाला सहजन कई तरह की पोषण कमियों और बीमारियों से निपटने की क्षमता रखता है.

सहजन चमत्कारी आरोग्य वृक्ष है…

सहजन अत्यधिक पौष्टिकता और औषधीय गुणों के कारण एनीमिया जैसी समस्या से निपटने में रामबाण है. एनीमिया महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को खासतौर पर प्रभावित करती है. सहजन के पत्ते, फल और बीज सभी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इनमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करने और रक्त निर्माण में मदद करती है. हाल के अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि सहजन का नियमित सेवन एनीमिया के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि सहजन की 100 ग्राम पत्तियों से दही से 9 गुना ज्यादा प्रोटीन, संतरे से 7 गुना ज्यादा विटामिन सी, गाजर से 4 गुना ज्यादा विटामिन ए, केले से 15 गुना ज्यादा पोटैशियम, पालक से 25 गुना ज्यादा आयरन, दूध से 17 गुना ज्यादा कैल्शियम मिलता है.

सहजन का उपयोग…

सहजन को सलाद, सूप या पत्तेदार सब्जियों के रूप में आहार में शामिल किया जा सकता है. 

सहजन के पत्तों का पाउडर बनाकर इसे दूध या अन्य खाद्य पदार्थों में मिलाकर भी सेवन किया जा सकता है.

एनीमिया से ग्रस्त लोगों को सहजन का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए, क्योंकि यह न केवल आयरन की कमी को पूरा करता है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.

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सहजन की पत्तियों को पेड़ से तोड़कर छाया में सुखाएं, कूटकर बारीक करके छानकर रख लें. फिर इस चूर्ण को सब्जी में मसाले की तरह प्रयोग करें. इसके साथ काढ़ा बनाकर आटे में गूंथकर प्रयोग किया जा सकता है.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे–5 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15 से 49 वर्ष की लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं. वहीं, छह माह से पांच वर्ष तक के लगभग 66 प्रतिशत बच्चे एनीमिक हैं. विभिन्न शोध पत्रों एवं आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट है कि सहजन पोषण का भंडार है. सहजन का हर भाग उपयोगी है और इसे भंडारित कर बाद में भी प्रयोग कर सकते हैं.

(सोर्स- IANS)

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