नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर ऋषि कपूर का मुंबई में बृहस्पतिवार सुबह निधन हो गया. लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे 67 वर्ष के थे. कल रात सांस लेने में परेशानी के कारण ऋषि कपूर को एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. ऋषि के भाई रणधीर बताया था कि यह सच है कि उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वह सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में हैं. उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था, उसे कुछ समस्या थी, इसलिए हमने उसे भर्ती कराया. यह खबर उस समय आई है जब एक दिन पहले ही कोलन इंफेक्शन के चलते इेरफान खान का निधन हो गया था. Also Read - BAFTA 2021 में इरफान खान-ऋषि कपूर को दी गई श्रद्धांजलि, फैंस बोले- दिल दुखी हो गया

आपको बता दें कि ऋषि कपूर को साल 2018 में कैंसर के बारे में पता चला था. इसके बाद अमेरिका में करीब एक साल तक कैंसर का इलाज कराने के बाद वह पिछले साल सितंबर में भारत लौटे थे. न्यूयॉर्क में इलाज के दौरान उनके साथ उनकी पत्नी और अभिनेत्री नीतू सिंह थीं. फरवरी में भी तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि उनके परिवार ने कभी भी उनकी बीमारी और उपचार के बारे में कोई खुलासा नहीं किया, लेकिन ऋषि कपूर ने डेक्कन क्रॉनिकल को दिए अपने एक इंटरव्यू में अपनी इस बीमारी, इसके दौरान किए गए संघर्ष और साथ ही अपने परिवार से मिले सपोर्ट के बारे में बताया . ऋषि ने ये भी बताया कि भारत लौटने से पहले उनका एक बोनमेरो ट्रांसप्लांट (bone marrow transplant) किया जाएगा. ऋषि कपूर ने कहा आगे कहा कि यूएस में मेरे 8 महीने का ट्रीटमेंट 1 मई को शुरू हुआ था. लेकिन मुझ पर भगवान की कृपा थी. Also Read - Ajooba के 30 साल, Amitabh Bachchan को आई Rishi Kapoor की याद, इमोशनल होकर बोले-साथी चले गए

क्या होता है बोन मैरो कैंसर Also Read - Indian Idol 12: Neetu Kapoor ने नेहा कक्कड़ को दिया शादी का शगुन, कहा 'ऋषि का भी है आशीर्वाद'....सिंगर हुई इमोशनल

बोन मैरो यानि अस्थि मज्जा मुख्य हड्डियों के बीच में एक मुलायम व स्पॉंजी टिशू है. इसमें रक्त बनाने वाली अपरिपक्व कोशिकाएं होती हैं जिन्हें स्टेम सेल्स कहते हैं. स्टेम सेल्स लाल रक्त कोशिकाओं (जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाती है), सफेद कोशिकाएं (जो संक्रमण से लड़ती हैं) और प्लेटलेट्स में विकसित होती हैं.

जानें कैसे होता है बोन कैंसर का इलाज

बोन कैंसर का उपचार बोन कैंसर की अवस्था और मरीज की स्थिति देखकर ही किया जाता है. बोन कैंसर के ईलाज के लिए कई बार तो कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या फिर इसी तरह की अन्य थेरपी से भी चिकित्सा की जाती है. बोन कैंसर की चिकित्सा बोन कैंसर से ग्रसित रोगी पर भी निर्भर करता है कि वह किस उम्र का है, बोन कैंसर किस स्टेज का है. बोन कैंसर के उपचार के लिए कई विधियां अपनाई जाती हैं. कई बार बोन कैंसर के लिए शल्य चिकित्सा अपनानी पड़ती है तो कई बार घरेलू नुस्खों से ही काम चल जाता है.

बोन मैरो कैंसर के लक्षण

बुखार होना, वजन का कम होना, हड्डियों में दर्द होना, बिना कारण फ्रैक्चर होना, एनीमिया, शारीरिक कमजोरी होना, शरीर में सूजन आना, ठीक से पोषण ना लेना, अत्यधिक थकान होना, चक्कर आना, प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना सभी बोन मैरो कैंसर और बोन कैंसर के लक्षणों में से एक हैं.