क्या सही वक्त पर पहचानने से अर्थराइटिस को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है? जानें डॉक्टरों से

अर्थराइटिस की शुरुआत अक्सर हल्के दर्द या सूजन से होती है, जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दिया जाए, तो इलाज आसान और असरदार हो सकता है

Published date india.com Published: October 23, 2025 8:15 AM IST
क्या सही वक्त पर पहचानने से अर्थराइटिस को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है? जानें डॉक्टरों से

अर्थराइटिस (Arthritis) यानी जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न की समस्या. आज के समय में बेहद आम हो चुकी है. यह सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब कम उम्र के लोगों में भी तेजी से फैल रही है. डॉ. अखिलेश यादव (डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट , मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली) का कहना है कि यदि इस रोग का पता शुरुआती चरण में लग जाए और समय रहते इलाज शुरू किया जाए, तो मरीज काफी हद तक सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन क्या अर्थराइटिस पूरी तरह ठीक हो सकता है? आइए जानते हैं इस बारे में डॉ. अखिलेश यादव, डायरेक्टर – ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, क्या कहते हैं.

कई प्रकार की होती है अर्थराइटिस-

डॉ. यादव बताते हैं कि अर्थराइटिस कई प्रकार का होता है, जिनमें सबसे आम हैं ओस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) और रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis).ओस्टियोआर्थराइटिस आमतौर पर उम्र बढ़ने या जोड़ों के अधिक इस्तेमाल से होता है, जबकि रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून रोग है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है.

उनके अनुसार, ‘अगर आर्थराइटिस की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए तो यह रोग काफी हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है. दवाओं, फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज, वजन नियंत्रित रखने और संतुलित आहार के जरिए दर्द और सूजन को कम किया जा सकता है. कई बार मरीजों को जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी बहुत राहत मिलती है.’

क्या पूरी तरह ठीक हो सकता है रोग?

डॉ. यादव यह भी बताते हैं कि पूरी तरह ‘ठीक’ होना आर्थराइटिस के प्रकार पर निर्भर करता है. उदाहरण के लिए, ओस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों की घिसी हुई हड्डी या कार्टिलेज पूरी तरह वापस नहीं आती, लेकिन सही उपचार से उसकी प्रगति को रोका जा सकता है. वहीं, रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों में शुरुआती अवस्था में दिए गए ‘डिजीज मॉडिफाइंग एंटी रूमेटिक ड्रग्स’ (DMARDs) काफी प्रभावी साबित होते हैं, जिससे रोग को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है.

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डॉ. यादव कहते हैं, ‘मुख्य बात है जागरूकता और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने की. कई लोग शुरुआत में जोड़ों के दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है. अगर समय रहते निदान हो जाए तो आर्थराइटिस को पूरी तरह नहीं तो काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और सर्जरी जैसी गंभीर स्थिति से भी बचा जा सकता है.’

अंत में, डॉ. यादव का सुझाव है कि हर व्यक्ति को अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सही मुद्रा में बैठना-चलना जोड़ों की सेहत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. शुरुआती पहचान और सही इलाज से आर्थराइटिस के मरीज भी सक्रिय और दर्द-रहित जीवन जी सकते हैं.

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