क्या बचपन में ज्यादा नमक का सेवन बढ़ा सकता है हार्ट डिजीज का खतरा? डॉक्टर से जानें सच

आजकल दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है, ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या बचपन में ज्यादा नमक खाने से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है? आइए डॉक्टर से जानते हैं.

Published date india.com Published: September 23, 2025 7:28 AM IST
क्या बचपन में ज्यादा नमक का सेवन बढ़ा सकता है हार्ट डिजीज का खतरा? डॉक्टर से जानें सच

अक्सर हम सोचते भी नहीं कि बचपन में क्या खिलाया जा रहा है, लेकिन इसका असर उम्र बढ़ने पर साफ दिखने लगता है. नमक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. डॉ. विवेक जैन ( वरिष्ठ निदेशक एवं यूनिट प्रमुख, बाल रोग, फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग) ने बताया कि छोटे बच्चे जब ज़्यादा नमक खाते हैं, तो धीरे-धीरे उनका शरीर हाई ब्लड प्रेशर की ओर धकेला जाने लगता है. और ये तो सब जानते हैं कि हाई बीपी ही दिल की बीमारियों की जड़ है.

डाइट का पड़ता है असर-

असल समस्या ये है कि स्वाद की आदतें भी बचपन से ही जम जाती हैं. जब बच्चे बार-बार सॉल्टी फूड्स खाते हैं, तो उनकी ज़ुबान उसी की आदी हो जाती है. बाद में जब उन्हें कम नमक वाला खाना देना हो, तो वो आसानी से मानते ही नहीं. यहीं कारण है कि कहा जाता है, ‘छोटी उम्र की डाइट, बड़े होने की सेहत तय करती है.’

इन गंभीर बीमारियों का खतरा-

नमक सिर्फ बीपी नहीं बढ़ाता. इसका बोझ किडनी भी झेलती है, बहुत अधिक नमक किडनी पर दबाव बढ़ता है और ब्लड वेसल्स की परत को नुकसान पहुंचाता है. उनकी परत धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. ये सब मिलकर भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे खतरे का कारण बनते हैं. ऊपर से प्रोसेस्ड फूड्स में तो नमक की भरमार होती ही है, साथ में एक्स्ट्रा कैलोरी और खराब फैट भी. इसका नतीजा मोटापा, फिर डायबिटीज और आगे चलकर दिल की बीमारियां.

असर डालती हैं ये चीजें-

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ये बात भी सही है कि हर बच्चे पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा. किसी का जेनेटिक्स मजबूत होता है, तो कोई ज़्यादा एक्टिव रहता है, लेकिन रिसर्च यहीं कहती हैं कि जिन बच्चों ने कम नमक खाया, उनका ब्लड प्रेशर सामान्य रहा और आगे चलकर उनका दिल भी ज्यादा हेल्दी रहा.

सीधी भाषा में कहें तो, बचपन में ज़्यादा नमक खिलाना सिर्फ ‘एक आदत’ नहीं है. ये शरीर की अंदरूनी प्रोग्रामिंग बदल देता है. दिल और किडनी को अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ता है. इसलिए माता-पिता को चाहिए कि नमक पर कंट्रोल रखें. ये एक छोटा-सा कदम है, लेकिन भविष्य में बच्चों की दिल की सेहत को बचाने में बहुत बड़ा योगदान देता है.

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