नई दिल्ली: कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के कारण शरीर के किसी हिस्से की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं. कैंसर जिस अंग से शुरू होता है, वहां से दूसरे अंगों में भी फैल सकता है. सबसे पहले शरीर के किसी अंग में होने वाला कैंसर प्राइमरी ट्यूमर कहलाता है. इसके बाद शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाला ट्यूमर मैटास्टेटिक या सेकेंडरी कैंसर कहलाता है. मैटास्टेटिक कैंसर की कोशिकाएं भी प्राइमरी कैंसर के जैसी ही होती हैं. मैटास्टेटिक कैंसर शब्द का इस्तेमाल सोलिड यानी ठोस ट्यूमर के लिए किया जाता है, जो शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया हो. Also Read - फिल्म इंडस्ट्री के लिए ये बहुत बुरा साल, नहीं रहे 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' के गीतकार अभिलाष, इलाज के लिए नहीं थे पैसे

Also Read - Brucellosis Precautions: चीन में नए वायरस का हमला, अब ब्रूसीलोसिस मचा रहा तहलका, जानें भारत में इससे बचने के क्या हैं उपाय

भारत में 8 में से एक महिला Breast Cancer की चपेट में, जानिए लक्षण, कारण और बचाव के उपाय Also Read - कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी हेल्‍थ चेक-अप के सिलसिले में गईं विदेश, राहुल गांधी भी हैं साथ

कैंसर के होते हैं इतने stages

कैंसर की मुख्य रूप से चार अवस्थाएं होती हैं. पहली और दूसरी अवस्था में कैंसर का ट्यूमर छोटा होता है और आस-पास के टिश्यूज की गहराई में नहीं फैलता. तीसरी अवस्था में कैंसर विकसित हो चुका होता है. ट्यूमर बड़ा हो चुका होता है और इसके अन्य अंगों में फैलने की संभावना बढ़ जाती है. चौथी अवस्था कैंसर की आखिरी या सबसे विकसित अवस्था होती है. इसमें कैंसर अपने शुरुआती हिस्से से अन्य अंगों में फैल जाता है. इसे विकसित या मैटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है.

प्याज-लहसुन वाली सब्जी खाने से Rectum के कैंसर का खतरा होता है कम

इतने तरीके से फैलता है कैंसर

कैंसर के फैलने के तीन तरीके हैं. डायरेक्ट एक्सटेंशन या इंवेजन, जिसमें प्राइमरी ट्यूमर आस-पास के अंगों और टिश्यूज में फैल जाता है. उदाहरण के लिए प्रोस्टेट कैंसर ब्लैडर तक पहुंच जाता है. लिम्फेटिक सिस्टम में कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट जाती हैं और इसके जरिए शरीर के दूसरे अंगों तक चली जाती हैं. लिम्फेटिक सिस्टम टिश्यूज और अंगों का ऐसा समूह है जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने के लिए कोशिकाएं बनाता और इन्हें स्टोर करके रखता है.

Health Alert: मोबाइल की ब्राइटनेस बढ़ाकर करती थी इस्‍तेमाल, आंख में हुए सैकड़ों छेद, जानिए पूरी वजह

कैसे फैलता है कैंसर

कैंसर खून से भी फैलता है. इसे हीमेटोजिनस स्प्रैड कहा जाता है, इसमें कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट कर खून में आ जाती हैं और खून की धारा के साथ शरीर के अन्य हिस्सों तक चली जाती हैं. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर खून या लिम्फेटिक सिस्टम में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं पर हमला करती है और इन्हें नष्ट कर देती हैं. लेकिन कभी-कभी कैंसर की कोशिकाएं जीवित रह कर शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंच जाती हैं और नया ट्यूमर बन लेती हैं.

Lungs Cancer के इलाज में Targeted Therapy असरदार, जानें क्‍या है ये?

ये होता है लक्षण

जब कैंसर फैल रहा होता है, उस समय इस बात की पूरी संभावना होती है कि यह शरीर के अन्य अंगों पर असर डाले. रोग के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर कौन से हिस्से में हुआ है. कैंसर के आम लक्षण हैं वजन में कमी, बुखार, भूख में कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या खून आना. यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि अगर किसी भी व्यक्ति को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. हो सकता है कि यह कैंसर न हो लेकिन रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होता है.

सर्दियों में आंखों में हो सूखापन या खुजली, ऐसे करें देखभाल

कैंसर के 60 फीसदी मामले तीन प्रकार के

भारत में कैंसर के 60 फीसदी मामले तीन प्रकार के होते हैं- मुंह, स्तन एवं गर्भाशय का कैंसर. हालांकि इनका निदान आसान है, लेकिन पूरा इलाज सिर्फ शुरुआती अवस्था में ही संभव है. अक्सर मरीज जब डॉक्टर के पास पहुंचता है तब बहुत देर हो चुकी होती है और कैंसर अडवान्स्ड अवस्था में पहुंच चुका होता है. नियमित जांच के द्वारा समय पर निदान किया जा सकता है. व्यक्ति को अपने शरीर के अंगों एवं कार्यो के बारे में जानकारी रखनी चाहिए. अगर शरीर के अंगों या कार्यो में कोई भी बदलाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और आवश्यकतानुसार जांच करवानी चाहिए.

लड़कों से ज्‍यादा लड़कियों को लगा सोशल मीडिया का चस्‍का, हो रहीं इस बीमारी का शिकार

ये करें उपाय

भीतरी अंगों के कैंसर का निदान अक्सर देर से होता है जैसे फेफड़े, ईसोफेगस, पैनक्रियाज, लिवर, ओवरी का कैंसर शरीर में धीरे धीरे बढ़ता है. ऐसे मामलों में आवश्यकतानुसार जांच की जाती है. भारत में आजकल पश्चिमी देशों की तरह कैंसर के इलाज के सभी आधुनिक तरीके उपलब्ध हैं जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, हॉर्मोनल थेरेपी और टारगेट थेरेपी. मरीज के जीवित रहने की संभावना कैंसर के ग्रेड, नंबर और मैटस्टेसिस की साइट पर निर्भर करती है. हालांकि मरीज की सकारात्मक सोच भी उसे ठीक होने में मदद करती है.

Alert: लगातार बैठकर करते हैं ऑफिस में काम तो जान लें ये बात, वरना लोग कहेंगे ‘Stupid’

समय पर निदान जरूरी

अगर कैंसर का निदान समय पर हो जाए तो यह जानलेवा नहीं है अैर इसका इलाज किया जा सकता है. कैंसर का इलाज मरीज पर अच्छी तरह काम करता है अगर मरीज खुश रहे, उम्मीद बनाए रखे, उसे परिवार एवं दोस्तों का प्यार और सहयोग मिले. भारत में कैंसर के आम प्रकार हैं- मुंह, स्तन, सर्वाइकल, फेफड़ों और प्रोस्टेट का कैंसर. शरीर के किसी भी अंग या इसके कार्यो में बदलाव दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. अपनी जांच करवानी चाहिए. इसके अलावा हर व्यक्ति को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए, घर का बना सेहतमंद आहार लें और रोजाना हल्का व्यायाम करें. भारत में मुंह के कैंसर के कारण सबसे ज्यादा मौतें होती हैं, इसका मुख्य कारण धूम्रपान और तंबाकू है. इसलिए तंबाकू का सेवन और धूम्रपान न करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

लाइफस्टाइल की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.