रायपुर: छत्तीसगढ़ के धान के तीन किस्मों में ‘कैंसर’ कोशिकाओं को नष्ट करने का गुण पाया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ का धान खतरनाक बीमारी कैंसर से लड़ने में मददगार साबित हुआ है. भाभा एटॉमिक रिसर्च सेन्टर मुम्बई में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सहयोग से किये जा रहे अनुसंधान में छत्तीसगढ़ की तीन औषधीय धान प्रजातियों – गठवन, महाराजी और लाईचा में फेफडे़ एवं स्तन के कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के गुण पाए गए हैं. Also Read - छत्तीसगढ़: कृषि विधेयकों के खिलाफ CM भूपेश बघेल का बड़ा कदम, विधानसभा में लाया जाएगा प्रस्ताव

अधिकारियों ने बताया कि इनमें से लाईचा प्रजाति कैंसर की कोशिकाओं का प्रगुणन रोकने और उन्हें समाप्त करने में सर्वाधिक प्रभावी साबित हुई है. औषधीय धान की ये तीनों प्रजातियां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में संग्रहित जर्मप्लाज्म से ली गई हैं. इस नए अनुसंधान से कैंसर के इलाज में आशा की एक नई किरण नजर आई है. Also Read - Lockdown in Chhattisgarh: कोविड-19 के संक्रमण के चलते छत्तीसगढ़ में 28 सितंबर तक लगेगा लॉकडाउन, रायपुर बना कंटेनमेंट जोन

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री रमन सिंह और कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अनुसंधान के परिणामों पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने में राज्य की बहुमूल्य धान प्रजातियां समक्ष है. कृषि वैज्ञानिक स्वर्गीय डाक्टर रिछारिया की मेहनत से इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों के धान जर्मप्लाज्म छत्तीसगढ़ के पास उपलब्ध है. Also Read - अब घर बैठे अपने यूरिन के कलर को देख आप भी जान सकते हैं बीमारियों के बारे में, ऐसे करें पहचान

अधिकारियों ने बताया कि प्रयोगशाला में किए गए अनुसंधान के निर्ष्कषों से पता चलता है कि इन तीनों किस्मों के मेथेनॉल में बने एक्सट्रेक्ट ने हयूमन ब्रेस्ट कैंसर और हयूमन लंग कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को ना केवल रोक दिया बल्कि कैंसर कोशिकाओं को नष्ट भी कर दिया.

धान की इन तीनों किस्मों में से लाईचा किस्म ब्रेस्ट कैंसर सेल्स को नष्ट करने में सबसे प्रभावी साबित हुई. लंग कैंसर सेल्स को नष्ट करने में तीनों किस्में लगभग बराबर प्रभावी रहीं. हयूमन ब्रेस्ट कैंसर सेल्स के संबंध में किये गए अनुसंधान में गठवन धान के एक्सट्रेक्ट ने जहां 10 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट किया वहीं महाराजी के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 35 प्रतिशत और लाईचा के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 65 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट कर दिया.

इसी प्रकार हयूमन लंग कैंसर के संबंध में किये गए अनुसंधान में गठवन धान के एक्सट्रेक्ट ने जहां 70 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट किया वहीं महाराजी के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 70 प्रतिशत और लाईचा के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 100 प्रतिशत कैंसर सेल्स को नष्ट कर दिया. कैंसर सेल्स नष्ट करने के लिए आवश्यक एक्टिव इन्ग्रेडिएट की मात्रा 200 ग्राम चावल प्रति दिन खाने से प्राप्त की जा सकती है.

अधिकारियों ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एस.के. पाटील ने अनुसंधान के परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि डाक्टर आर.एच. रिछारिया द्वारा संग्रहित छत्तीसगढ़ की धान की किस्मों में कैंसर का इलाज पाया जाना विश्वविद्यालय और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि अनुसंधान के परिणामों के आधार पर शीघ्र ही कैंसर का इलाज खोजा जा सकेगा. उन्होंने कहा कि अनुसंधान के अगले चरण में इन चावल की किस्मों से एक्टिव तत्व अलग करने और उनका चूहों पर प्रयोग करने की योजना तैयार की जा रही है.