बच्चे को टचस्क्रीन का 'नशा' है? हो सकता है वो कभी लिख न पाए

ब्रिटेन के चिकित्सकों का कहना है कि फोन और टैबलेट के बेतहाशा इस्तेमाल से बच्चों की अंगुलियों की मांसपेशियां सही ढंग से विकसित नहीं हो पाती हैं, जिससे उन्हें पेंसिल या पेन पकड़ने में मुश्किल आ सकती है.

Written by: Press Trust of India Edited by: Nirmala Devi
Updated: February 26, 2018, 1:49 PM IST

लंदन: ब्रिटेन के चिकित्सकों का कहना है कि फोन और टैबलेट के बेतहाशा इस्तेमाल से बच्चों की अंगुलियों की मांसपेशियां सही ढंग से विकसित नहीं हो पाती हैं, जिससे उन्हें पेंसिल या पेन पकड़ने में मुश्किल आ सकती है. ब्रिटेन के हॉर्ट ऑफ इंग्लैंड फाउंडेशन एनएचएस ट्रस्ट की प्रधान पीडियाट्रिक थेरेपिस्ट सैली पायने ने कहा, उतने मजबूत एवं निपुण हाथों वाले बच्चे स्कूल में नहीं आ रहे हैं जो 10 साल पहले देखने को मिलती थी.

उन्होंने कहा, पेंसिल पकड़ने और चलाने के लिए आपकी अंगुलियों की बारीक मांसपेशियों पर आपका मजबूत नियंत्रण होना चाहिए. इन कौशलों को विकसित करने के लिए बच्चों को बहुत मौकों की जरूरत पड़ती है. समाचार-पत्र गार्डियन ने पायन के हवाले से कहा है, बच्चों को ब्लॉक बनाने, खिलौने या रस्सियां खींचने जैसे मांसपेशियां बनाने वाले खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करने की बजाए उन्हें आईपैड पकड़ा देना ज्यादा आसान होता है.

लंदन की ब्रूनेल यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च क्लिनिक चलाने वाली मेलिसा प्रूंटी ने कहा कि तकनीक के अत्याधिक इस्तेमाल के चलते कई बच्चों में लिखने का हुनर देर से विकसित हो सकता है. यह क्लिनिक लिखावट समेत बचपन में सीखे जाने वाले अन्य कौशल की जांच करता है. यह भी पढ़ें: वैज्ञानिकों ने बनाईं आर्टिफीशियल आंखें, धुंधली तस्वीरों को देखने में होंगी मददगार

इतने घंटे फोन पर बिताते हैं बच्चे

जब बच्चे बहुत छोटे होते हैं तभी से इस समस्या की शुरुआत हो जाती है लेकिन पैरंट्स इस आने वाले खतरे को समझ नहीं पाते. 10 साल या उसके आसपास के बच्चे ही नहीं बल्कि इन दिनों तो बहुत छोटे यानी 3-4 साल के बच्चे भी मोबाइल और टैबलेट स्क्रीन से इतने ज्यादा चिपके रहते हैं जितना पहले कभी नहीं थे. एक स्टडी के नतीजे बताते हैं कि दुनियाभर में 8 से 12 साल के बीच के बच्चे हर दिन करीब 4 घंटा 36 मिनट का वक्त स्क्रीन मीडिया के सामने बिताते हैं.

साइकॉलजिस्ट डॉ शीमा हफीज कहती हैं, मनोरंजन के मकसद से तो शायद भारत के बच्चे भी इतना ही वक्त मोबाइल और टीवी के सामने बिताते होंगे लेकिन अगर स्कूल में होने वाली कम्प्यूटर साइंस की क्लास और एक्सपोजर के दूसरे माध्यमों को भी जोड़ दिया जाए तो भारतीय बच्चों के लिए यह समय और ज्यादा हो जाता है.

संबंधित खबरे

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Health की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.