नई दिल्ली: चीन में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पहले नेजल स्प्रे वैक्सीन  (nasal spray vaccine ) को ट्रायल के लिए मंजूरी मिल गई है. इस वैक्सीन का प्रथम चरण का ट्रायल नवंबर से शुरु होगा. वैज्ञानिक इस ट्रायल को 100 लोगों पर करेंगे. बता दें कि चीन से फैली कोरोना वायरस की इस महामारी के चलते दुनियाभर में अब तक 2.8 करोड़ लोग इस महामारी के चपेट में आए है वहीं संक्रमण से हुई मौतें 908,000 से अधिक हो गई हैं. सीएसएसई के अनुसार, अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक प्रभावित देशों की सूची में शीर्ष पर हैं. यहां 6,395,904 मामले और संक्रमण से हुई 191,753 मौत दर्ज की गई है. वहीं भारत 4,465,863 मामलों के साथ वर्तमान में दूसरे स्थान पर है, जबकि यहां 75,062 लोगों की जान जा चुकी है.Also Read - Corona Vaccine Latest Update In India: अब बाजार में भी मिलेगी Covishield और Covaxin, जानिए क्या होगी कीमत

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, यह पहली ऐसी वैक्सीन है जिसे चीन के नेशनल मेडिकल प्रोडक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन से मंजूरी मिली है. बता दें कि इस वैक्सीन को चीन और हॉन्ग कॉन्ग एक सामूहिक मिशन के तरह विकसित किाया जा रहा है. इस मिशन में यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग कॉन्ग, शियामेन यूनिवर्सिटी और पेइचिंग वंताई बायोलॉजिकल फार्मेसी के शोधकर्ता शामिल हैं. Also Read - चीनी सेना PLA ने इंडियन आर्मी को सौंपा अरुणाचल प्रदेश के 19 साल के लड़के को: केंद्रीय मंत्री रिजिजू का ट्वीट

हांगकांग यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट यूवेन क्योंग व्योंग ने बताया कि नाक से दी जाने वाली इस वैक्सीन से दोहरी सुरक्षा मिलती है. यह एन1एच1 जैसे फ्लू के साथ ही कोरोना वायरस को भी निष्क्रिय करता है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस वैक्सीन से साइड इफेक्ट के तौर पर दमा और सांस फूलने जैसी मुश्किल हो सकती है. इसके साथ ही यूवेन ने यह भी बताया कि इस वैक्सीन के 3 ट्रायल किए जाएंगे जिसे पूरा होने में एक और साल का समय लग सकता है. बीजिंग स्थित एक प्रतिरक्षाविज्ञानी ने बताया कि इंजेक्शन की तुलना में, नेजल स्प्रे का टीकाकरण करना आसान है और यह बड़े पैमाने पर उत्पादन करने और वितरित करने में भी आसान होगा. Also Read - IMF ने 2022 में भारत की वृद्धि दर का अनुमान 9 प्रतिशत किया, चीन 4.8%, यूएस 4% फीसदी पर रहेंगे