नई दिल्ली: कोरोना महामारी से अबतक दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो चुकी है. दुनिया के कई देश इस कोरोना महामारी से बचने के लिए वैक्सीन का ट्रायल कर रहे हैं. ऐसे में भारत में हुए आयुर्वेदिक पद्धति से कोरोना संक्रमण के इलाज के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे बेहतर मिले हैं. तीन अस्पतालों में चल रहे क्लीनिकल ट्रायल की अंतरिम रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. कोरोना संक्रमण के इलाज में इम्युनोफ्री और रेजिनम्युन नामक आयुर्वेदिक दवाओं के मिश्रण के प्रभाव का पता लगाने के लिए क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है.Also Read - महाराष्ट्र में कोरोना अनलॉक के नियमों से व्यापारी संघ नाराज, कहा- कोरोना संक्रमण कम होने के बावजूद सख्ती क्यों?

रिपोर्ट के अनुसार, इस मिश्रण को सरकार की ओर से किए जा रहे पारंपरिक इलाज के मुकाबले ज्यादा कारगार माना गया है. इम्युनोफ्री कोरिवल लाइफ साइंसेज की दवा है जबकि रेजिनम्युन बायोगेटिका की. इसके अलावा, अलग-अलग तरह के टेस्ट जैसे -सी रिएक्टिव प्रोटीन, प्रोक्लेसिटोनिन, डी डायमर और आरटी-पीसीआर में भी पारंपरिक उपचार की तुलना में प्राकृतिक इलाज से 20 से 60 फीसद तक सुधार देखने को मिले हैं. प्राकृतिक इलाज से शरीर में दर्द और थकान में भी कमी आई है. Also Read - Covid 19 R Value: कोरोना की तीसरी लहर की तरफ बढ़ रहा देश? आर वैल्यू पहुंचा 1 के पार

रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक और पारंपरिक तरीके से कोरोना के मरीजों का उपचार किया गया. जिन मरीजों का भी प्राकृतिक तरीकों से उपचार किया गया, उनमें 5 दिनोंके अंदर 86.66 फीसदी मरीजों के टेस्ट नेगेटिव आए. वहीं, पारंपरिक तरीके से इलाज कराए गए 60 फीसदी मरीजों के ही टेस्ट नेगेटिव आए. Also Read - Covid 19 Third Wave: विशेषज्ञों का अनुमान- अगस्त में दिखेगा कोरोना की तीसरी लहर का कहर, अक्टूबर में बढ़ेंगे मामले