
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
कैंसर एक बेहद गंभीर बीमारी है, इसका नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं. पिछले कुछ सालों में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ हैं, इन्हीं में से एक है कोलोरेक्टल कैंसर. इसे कोलन और रेक्टल कैंसर के नाम से ही जाना जाता है.
आज ये दुनिया में सबसे आम कैंसर में से एक है. इसके लक्षणों के बारे में देर से पता चलने के कारण इसका इलाज करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो जाता है. हालांकि कैंसर होने से कुछ समय पहले से ही हमारी बॉडी इसे लेकर संकेत देने लगती है, जिन्हें हमें इग्नोर नहीं करना चाहिए और समय रहते इनपर ध्यान देना चाहिए. ऐसे में आज हम आपको अपने लेख में कोलोरेक्टल कैंसर के संकतों के बारे में बताएंगे और इसके खतरे से कैसे बचा जाए उसपर भी बात करेंगे.
कोलोरेक्टल कैंसर के दौरान दिखने वाले 5 आम लक्षण:
मल त्याग करने की आदतों में बदलाव : कोलोरेक्टल कैंसर की परेशानी में बिना किसी ज्ञात कारण के पेट में दर्द हो सकता है. कई बार हमें दस्त या कब्ज की समस्या हो जाती है और ऐसा महसूस होता है जैसे कि आंत्र पूरी तरह से खाली नहीं हुई है, ऐसा बॉउल की आदतों में बदलाव के चलते हो सकता है. अगर यह स्थिति कई हफ्तों तक बनी रहे तो यह कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत हो सकता है.
खुद को सुरक्षित रखने के तरीके-
नियमित स्क्रीनिंग: इस कैंसर का पता लगाने के लिए सबसे उपयोगी तरीकों में से एक है 45 वर्ष की आयु के बाद, कोलोनोस्कोपी जैसी नियमित स्क्रीनिंग कराना. यदि इस कैंसर को लेकर आपका पारिवारिक इतिहास है तो आपके लिए ये बेहद जरूरी है.
स्वस्थ आहार: कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को कम करने के लिए फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसे हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करें. रेड और प्रोसेस्ड मीट का सेवन सीमित करें क्योंकि इससे खतरा बढ़ जाता है.
नियमित व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम या एक्सरसाइज करने से कोलोरेक्टल कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है, क्योंकि एक्सरसाइज पाचन में सुधार करने और शरीर के वजन को सामान्य स्थिति में रखने में मदद करती है.
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें: कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते खतरे धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन दोनों से जुड़े हैं. ऐसे में इससे दूरी बना लें.
मेडिकल हिस्ट्री पर दें ध्यान: अगर आपके परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा है तो आपको इसका खतरा अधिक है. ऐसे में समय-समय पर जांच कराते रहें.
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