पूरी दुनिया में विकराल रूप ले चुका कोरोना वायरस अपने साथ एक मानसिक स्वास्थ्य महामारी भी लेकर आया है. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए दुनिया भर में लॉकडाउन की अनिश्चितता ने बड़ी संख्या में लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है. हालांकि पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) अक्सर युद्ध से जुड़ा होता है, यह उन लोगों के साथ भी हो सकता है जो किसी दुर्घटना या इस तरह की महामारी जैसे दर्दनाक अनुभव से गुज़रे हों. विशेषज्ञ लॉकडाउन से बाहर आने वाले बहुत से लोगों में पीटीएसडी के लक्षण दिखने का अनुमान लगा रहे हैं. यहां तक ​​कि अगर उनको क्लीनिकल ​​रूप से निदान नहीं किया गया है, तो वे लोग स्ट्रांग इमोशन स्ट्रेस से पीड़ित हो सकते हैं जो महामारी के खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक रह सकता है. Also Read - Covid-19 Cases in Bihar: प्रवासियों के लौटने के बाद तेजी से फैला संक्रमण, 206 नए मामले, कुल 3, 565 संक्रमित, जानें कहां कितनी संख्या

ऐसे मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा शिकार स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अन्य आवश्यक सेवाओं में काम करने वाले लोग होते हैं, जो इस महामारी से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. वे लोग जो पहले से ही मेंटल हेल्थ जैसी बीमारी एंजाइटी या डिप्रेशन से पीड़ित हैं, उनके लिए यह अधिक जोखिम भी हो सकता है. कुछ चीजें हैं जो आज आप कर सकते हैं. यह सुनिश्चित करें कि आप अपने मेंटल हेल्थ पर कम से कम प्रभाव के लिए महामारी जैसे दौर को भूल सकते हैं. आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आप क्या महसूस कर रहे हैं. यह समस्याएं लंबे समय तक हो सकती है. Also Read - 5,000 के पार पहुंची कोविड-19 से मरने वालों की संख्या, कल से शुरू होगा लॉकडाउन से निकलने का पहला चरण; 13 बड़ी बातें

क्या हैं संभावित लक्षण 
लक्षण कई अलग-अलग तरीकों से प्रकट हो सकते हैं. इनमें बुरे सपने, परेशान करने वाली यादें या फ्लैशबैक शामिल हैं, हर समय तनावग्रस्त और चिड़चिड़ा रहना और सोने में भी परेशानी होना. आप हाइपर-सतर्क भी हो सकते हैं और ध्यान केंद्रित करने में भी परेशानी हो सकती है. यह लक्षण यदि लगातार रहते हैं, तो PTSD के रूप में निदान किया जा सकता है. हालांकि, आइसोलेशन में अगर यह लक्षण आप महसूस कर रहे हैं तो आपको इसका निदान करने की आवश्यकता नहीं है. Also Read - दिल्ली में कोरोना का नया रिकॉर्ड, 1 दिन में 1163 नए मामले सामने आए

मरीजों को अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उन्हें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि वे खुद को क्या बता रहे हैं और कैसे उन्हें महसूस कर रहे हैं और वे क्या करते हैं. अगर आपके विचार काले और सफेद या भयावह है तो आप सतर्क हो जाएं.

कितने समय तक हो सकती है यह समस्याएं
आम तौर पर रोगी समय की अवधि में स्वाभाविक रूप से ठीक हो जाते हैं. वे आम तौर पर लक्षण दिखने के कुछ महीनों के भीतर ठीक हो जाते हैं। हालांकि,कभी ऐसा भी होता है कि जब मरीज समय के साथ ठीक नहीं होते हैं. यह तब होता है जब उन्हें अपने परिवार, दोस्तों या किसी चिकित्सक से मदद लेने में ब्रेक हो जाता है.

खुद को रिलैक्स रखें
जब लोग डिप्रेश महसूस कर रहे होते हैं, तब भी बहुत से लोग खुद को रिलैक्स रखते हैं. यह अभी मुश्किल लग सकता है, लेकिन कई ऐसे तरीके हैं जिससे आप खुद को तनावमुक्त रख सकते हैं. अपने दिनचर्या में ऐसी चीजों को शामिल करें जिससे खुद को मानसिक तनाव से दूर रख सकें. हालांकि, यदि आपको ऐसा लगता है कि इन चीजों के लिए प्रोफेशनल माध्यम की आवश्यकता है तो इसे अनदेखा न करें और इसे जरूर करें.