Coronavirus: पूरी दुनिया में कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़े हैं. अमेरिका में इस महामारी का प्रकोप काफी बढ़ गया है. इस वायरस के इलाज में ट्रंप हाइड्रोक्सीक्लोरीक्वीन टेबलेट के प्रयोग की बात कह रहे हैं. जबकि इसके ठीक उलट, उनके देश के डॉक्टर इस दवा के प्रयोग को लेकर आशंकित हैं. Also Read - सऊदी अरब ने फिर से खोलीं 90 हजार मस्जिदें, मक्का अब भी बंद

व्हाइट हाउस से प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लगातार दूसरे दिन ट्रंप ने इस दवा के प्रयोग की बात कही है. यही नहीं, उन्होंने पीएम मोदी से बात की है और मोदी से मलेरिया के इलाज में कारगर हाइड्रोक्सीक्लोरीक्वीन टेबलेट पर लगे प्रतिबंध को हटाकर सप्लाई शुरू करने की मांग की है. Also Read - उत्तराखंड कैबिनेट को क्‍वारंटाइन में भेजने की जरूरत नहीं: स्वास्थ्य सचिव

ट्रंप का यह बयान उस वक्त आया है जब कोरोनावायरस के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के प्रभावी होने का ठोस सबूत नहीं मिला है. Also Read - Coronavirus Lockdown: स्कूलों को फिर से खोलने की योजना पर अभिभावकों की बढ़ी चिंता, जानें क्या है सरकार की प्लानिंग

क्या है शक

ट्रंप की हर दिन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अक्सर मौजूद रहने वाले अमेरिका के टॉप संक्रामक रोग एक्सपर्ट एंथनी फॉसी ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के बारे में चेतावनी दी थी और कहा था कि इस दवा से कोरोनावायरस खत्म हो जाता है, इसके कोई सबूत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए कंट्रोल्ड क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत है ताकि यह पता चल सके कि यह कोविड-19 मरीजों के लिए सेफ है या नहीं.

 

एक्सपर्ट्स की राय

रोड आईलैंड की ब्राउन यूनिवर्सिटी में इमरजेंसी फिजिशियन डॉक्टर मेगन एल रेने कहती हैं, ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के कई साइड इफेक्ट्स भी हैं. इससे साइकेट्रिक लक्षण, हृदय रोग से संबंधित समस्याएं और अन्य साइड इफेक्ट्स शामिल हैं.’

डॉक्टर का कहना है कि ये दवा कुछ मरीजों के लिए असरदार हो सकती है, पर ये इस वायरस के इलाज में कितनी फायदेमंद है, इसके वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद नही हैं’.

दवा पर ट्रायल

बता दें कि वायरस के इलाज में इस दवा के कारगर होने पर ज्यादा क्लिनिकल ट्रायल नही हुए हैं. पिछले सप्ताह चीनी रिसचर्स ने एक ट्रायल की रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि इस दवा के दिए जाने पर मरीजों की रिकवरी तेज हुई.

पर ट्रंप का कहना है कि वे सालों तक चलने वाले ट्रायल का इंतजार नहीं कर सकते. वहां लोग मर रहे हैं और उन्हें बचाना उनकी प्राथमिकता है.

भारत में दवा का प्रयोग

आपको बता दें कि भारत सरकार ने कई फार्मास्युटिकल कंपनियों को दस करोड़ से ज्यादा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन गोलियों का ऑर्डर दिया है जिसकी सिफारिश आईसीएमआर ने कोविड-19 के खिलाफ काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिहाज से ऐहतियातन इस्तेमाल के लिए की है.

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इस दवाई का इस्तेमाल कोरोना वायरस के रोगियों या संदिग्धों की देखभाल में लगे लोगों के लिए करने की सिफारिश की है. घरों में रह रहे उन लोगों के लिए भी दवा की सिफारिश की गयी है जिनमें बीमारी के लक्षण नहीं हैं लेकिन जो संक्रमितों के संपर्क में आए हैं.