Coronavirus In Air: कोरोनावायरस से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. लोग लॉकडाउन में हैं, तमाम सावधानियां बरत रहे हैं. पर अब जो खबरें आ रही हैं उससे लोगों को और एलर्ट हो जाना चाहिए Also Read - COVID-19: हांगकांग ने भारत से आने वाली फ्लाइट्स कल से 3 मई तक के लिए स्थगित कीं

अब तक आपने-हमने यही जाना है कि कोरोना सक्रंमित व्यक्ति के खांसने-छींकने से ही ये वायरस फैलता है. पर कुछ शोध ये साबित कर चुके हैं कि कोरोनावायरस हवा में तीन घंटे तक जीवित रह सकता है. यही नहीं, व्यक्ति के छींकने पर एक वक्त पर थूक के 3,000 से अधिक कण यानी ड्रॉपलेट्स शरीर से बाहर आते हैं. Also Read - Bihar: JDU MLA व पूर्व मंत्री मेवालाल चौधरी का COVID-19 से पटना में निधन

यानी अगर किसी संक्रमित व्यक्ति ने छींक दिया तो ये वायरस हवा में जिंदा रहेगा. ऐसे में दूसरे लोगों को ये कितनी आसानी से अपना शिकार बना सकता है, इसका अंदाजा आप खुद ही लगाएं. Also Read - Covid 19 Cases In Rajasthan: राजस्थान में लॉकडाउन जैसे नियम, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस शोध के तथ्य सामने आने के बाद अस्पताल कर्मियों को अधिक सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है. उन्हें एन-95 मास्क पहने रहना चाहिए.

अमेरिका के नेशनल इंस्ट्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोनावायरस हवा में तीन से चार घंटे रह सकता है.

इनकी स्टडी को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छापा गया है. इस स्टडी से पता चलता है कि यह वायरस छींक या खांसी के दौरान बाहर निकलने पर बूंदों में तीन घंटे तक जीवित रह सकता है. इसमें ये भी कहा गया है कि 1 से 5 माइक्रोमीटर के आकार वाली ये बूंदें मानव बाल की मोटाई से 30 गुना छोटी होती हैं. ये बूंदें कई घंटों तक हवा में बनी रह सकती हैं.

इससे पहले WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रो एडेनॉम गैब्रिएसस भी एक प्रेस कांफ्रेंस में कह चुके हैं कि कोरोना एयरबॉर्न यानी हवा से भी फैलने वाला वायरस है. इसलिए ये और खतरनाक है.

गर्मी से कितना असर होगा

कई वायरस तापमान बढ़ते ही नष्ट हो जाते हैं. पर कोरोनावायरस इनमें शामिल नहीं है. 60 से 70 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भी ये नष्ट नहीं होता. हालांकि मौसम बदलने का इस पर क्या असर होगा, ये नहीं कहा जा सकता. वैज्ञानिक आशावान इसलिए हैं क्योंकि 2002 के नवंबर में सार्स महामारी शुरू हुई थी, जो जुलाई में खत्म हो गई थी. इसके अलावा वैज्ञानिक ये मान रहे हैं क्योंकि गर्मियों में ड्रॉपलेट्स बाहर गिरने पर जल्दी सूख सकते हैं. गर्मी में कोरोना नष्ट होगा इसका कोई ठोस सबूत नहीं है.