Covid-19 Longterm Effects: एक अध्ययन के अनुसार, कोविड -19 के 50 से अधिक दीर्घकालिक प्रभावों का पता चला है. इसमें हल्के से दुर्बल करने वाले लक्षण ठीक होने के बाद हफ्तों से लेकर महीनों तक रहते हैं.Also Read - BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली ने घरेलू क्रिकेटरों की मैच फीस बढ़ाए जाने के फैसले का स्वागत किया

ह्यूस्टन मेथोडिस्ट के एक अध्ययन में पाया गया है कि इन सुस्त लक्षणों में सबसे आम 58 प्रतिशत थकान, इसके बाद सिरदर्द (44 प्रतिशत), ध्यान विकार (27 प्रतिशत), बालों का झड़ना (25 प्रतिशत), सांस की तकलीफ ( 24 प्रतिशत), स्वाद की हानि (23 प्रतिशत) और गंध ना आना आदि (21 प्रतिशत) शामिल हैं. Also Read - Coronavirus cases In India: 24 घंटे में 30,256 लोग हुए संक्रमित, 295 लोगों की हुई मौत

अन्य लक्षण फेफड़ों की बीमारी से संबंधित थे. जैसे खांसी, सीने में परेशानी, फुफ्फुसीय प्रसार क्षमता में कमी, स्लीप एपनिया और फुफ्फुसीय फाइब्रोसिस, हृदय संबंधी समस्याएं आदि. Also Read - COVID-19 Update: कोरोना के 30,773 नए केस आज आए, केरल के 19,325 मामले शामिल, एक्‍ट‍िव मरीजों की संख्‍या घटी

शोधकतार्ओं को यह भी आश्चर्य हुआ कि मनोभ्रंश, अवसाद, चिंता और जुनूनी-बाध्यकारी विकारों जैसे तंत्रिका संबंधी लक्षणों की व्यापकता भी पाई गई.

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन के लिए, टीम ने अमेरिका, यूरोप, यूके, ऑस्ट्रेलिया, चीन, मिस्र और मैक्सिको में किए गए 15 पीयर-रिव्यू अध्ययनों में से 47,910 रोगियों का विश्लेषण किया.

उन्होंने असामान्य छाती एक्स-रे और सीटी स्कैन, रक्त के थक्के जोखिम, सूजन की उपस्थिति, एनीमिया, और संभावित दिल की विफलता, जीवाणु संक्रमण और फेफड़ों की क्षति के संकेतक सहित कई बायोमाकर्स को मापा. उन्होंने पाया कि 80 प्रतिशत रिकवर वयस्कों में हल्के, मध्यम और गंभीर कोविड -19 के तीव्र संक्रमण के बाद हफ्तों से महीनों तक कम से कम एक दीर्घकालिक लक्षण था.

कुल मिलाकर, टीम ने 55 लक्षणों, संकेतों और असामान्य प्रयोगशाला परिणामों की पहचान की, जिनमें से अधिकांश प्रभाव कोविड -19 के तीव्र चरण के दौरान विकसित रोगसूचकता के समान थे.

कई देशों में इसी तरह के लगातार प्रभावों की पहचान करते हुए, शोधकतार्ओं का कहना है कि उनका अध्ययन लॉन्ग कोविड के बोझ की पुष्टि करता है और इन पुरानी जटिलताओं को पहचानने की तात्कालिकता पर जोर देता है. उन्हें समुदाय को स्पष्ट रूप से संप्रेषित करता है और कोविड से दीर्घकालिक परिणामों से बचने के लिए चिकित्सीय रणनीतियों को परिभाषित करता है.

उनके शोध का अगला चरण यह निर्धारित करने पर केंद्रित होगा कि क्या कुछ व्यक्तियों को लॉन्ग कोविड के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है.
(एजेंसी से इनपुट)