दुनिया की टॉप फार्मा कंपनी AstraZeneca ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ एक समझौता किया है. इसके तहत कंपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित COVID-19 Vaccine का उत्पादन करेगी. साथ ही उसने कहा है कि वह इस वैक्सीन के उत्पादन में कोई लाभ भी नहीं कमाएगी. Also Read - 'कोरोना वायरस को जैविक हथियार बनाकर युद्ध लड़ना चाहता था चीन, 2015 में किया था टेस्ट'

ब्रिटिश न्यूजपेपर डेली मेल के मुताबिक AstraZeneca इस वैक्सीन का उत्पादन व्यापक स्तर पर करेगी. रिपोर्ट के मुताबिक Oxford University के वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन को विकसित किया है. दुनिया में इस वैक्सीन की जरूरत और मानवता को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने ये करार किया है. Also Read - कोरोना वायरस से संक्रमित सपा सांसद आजम खान की तबियत बिगड़ी, बेटे सहित लखनऊ के अस्पताल में भेजा गया

इस वैक्सीन का नाम ChAdOx1 nCoV-19 दिया गया है. इसका पिछले सप्ताह से इंसानों पर परीक्षण शुरू कर दिया गया है. उम्मीद की जा रही है कि इसका पहला रिजल्ट जून के दूसरे सप्ताह तक आ जाएगा. Also Read - Diet for Covid Positive : कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर क्या खाएं मरीज? स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शेयर की पूरी लिस्ट; यहां देखें

Oxford University ने अपने एक बयान में कहा है कि अगर यह वैक्सीन कोरोना से लड़ने में कारगर साबित होती है तो ब्रिटेन को सबसे पहले इसकी आपूर्ति की जाएगी.

Oxford University और फार्मा कंपनी के बीच हुई इस डील को ब्रिटिश सरकार ने भी स्वागत किया है. Oxford University और फार्मा कंपनी दोनों ने कहा है कि उनका यह वेंचर लाभ कमाने के लिेए नहीं है. इसमें कहा गया है कि ग्राहकों से केवल इस वैक्सीन के उत्पादन और डिस्ट्रिब्यूशन पर आने वाले खर्च को ही वसूला जाएगा.

ऐसे माना जाता है कि किसी भी बीमारी की वैक्सीन बनाने में दशकों लगते हैं लेकिन कोरोना के मामले में वैज्ञानिकों का कहना है कि 18 महीने में इसका वैक्सीन ढूंढना काफी सराहनीय काम होगा.

वैसे भारत में भी कोरोना की वैक्सीन बनाने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबित दुनिया के अन्य कई देश के वैज्ञानिक भी इस काम में लगे हैं, लेकिन अभी तक मुक्कमल तौर पर कोई भी वैक्सीन सफल साबित नहीं हुई है. वैसे भारत ने कोरोना की टेस्ट के लिए बेहद किफायती टेस्ट किट बना लिया है.