दुनिया की टॉप फार्मा कंपनी AstraZeneca ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ एक समझौता किया है. इसके तहत कंपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित COVID-19 Vaccine का उत्पादन करेगी. साथ ही उसने कहा है कि वह इस वैक्सीन के उत्पादन में कोई लाभ भी नहीं कमाएगी. Also Read - कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने में मदद करेगी गुजरात कोविड म्यूटेशन अध्ययन, जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय 

ब्रिटिश न्यूजपेपर डेली मेल के मुताबिक AstraZeneca इस वैक्सीन का उत्पादन व्यापक स्तर पर करेगी. रिपोर्ट के मुताबिक Oxford University के वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन को विकसित किया है. दुनिया में इस वैक्सीन की जरूरत और मानवता को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने ये करार किया है. Also Read - थूक के इस्‍तेमाल पर रोक से बिगड़ेगा गेंद-बल्‍ले का संतुलन, अनिल कुंबले का सुझाव, पिच में हो बदलाव

इस वैक्सीन का नाम ChAdOx1 nCoV-19 दिया गया है. इसका पिछले सप्ताह से इंसानों पर परीक्षण शुरू कर दिया गया है. उम्मीद की जा रही है कि इसका पहला रिजल्ट जून के दूसरे सप्ताह तक आ जाएगा. Also Read - Pakistan Coronavirus Update: 24 घंटे में सबसे ज्यादा मामले आए सामने, संक्रमितों की संख्या 80 हजार के पार

Oxford University ने अपने एक बयान में कहा है कि अगर यह वैक्सीन कोरोना से लड़ने में कारगर साबित होती है तो ब्रिटेन को सबसे पहले इसकी आपूर्ति की जाएगी.

Oxford University और फार्मा कंपनी के बीच हुई इस डील को ब्रिटिश सरकार ने भी स्वागत किया है. Oxford University और फार्मा कंपनी दोनों ने कहा है कि उनका यह वेंचर लाभ कमाने के लिेए नहीं है. इसमें कहा गया है कि ग्राहकों से केवल इस वैक्सीन के उत्पादन और डिस्ट्रिब्यूशन पर आने वाले खर्च को ही वसूला जाएगा.

ऐसे माना जाता है कि किसी भी बीमारी की वैक्सीन बनाने में दशकों लगते हैं लेकिन कोरोना के मामले में वैज्ञानिकों का कहना है कि 18 महीने में इसका वैक्सीन ढूंढना काफी सराहनीय काम होगा.

वैसे भारत में भी कोरोना की वैक्सीन बनाने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्ट के मुताबित दुनिया के अन्य कई देश के वैज्ञानिक भी इस काम में लगे हैं, लेकिन अभी तक मुक्कमल तौर पर कोई भी वैक्सीन सफल साबित नहीं हुई है. वैसे भारत ने कोरोना की टेस्ट के लिए बेहद किफायती टेस्ट किट बना लिया है.