मध्यम आयु वर्ग वाले लोगों के ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट डिमेंशिया या स्ट्रोक के बढ़ते खतरे का संकेत हो सकता है. ब्लड प्रेशर में गिरावट होने से उन्हें खड़े होने के दौरान बेहोशी, चक्कर आना जैसा महसूस होता है. हाल ही में हुई एक स्टडी में कहा गया है कि ऐसे लोग, जिन्हें ब्लड प्रेशर में गिरावट का अनुभव किया, उनमें डिमेंशिया विकसित होने का 54 फीसदी ज्यादा जोखिम पाया गया.

ब्लड प्रेशर में गिरावट महसूस करने वाली स्थिति को ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है. इनमें इस्केमिक स्ट्रोक विकसित होने की संभावना दोगुना पाई गई. यह स्थिति दिमाग को ब्लड ले जाने वाली रक्त वाहिका में ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) बनने के कारण होती है.

अमेरिका के मैरीलैंड में जॉन हॉकिंस विश्वविद्यालय की एंड्रिया रॉवलिंग्स ने कहा, “ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन दिल की बीमारी, बहोश होने और गिरने से जुड़ी हुई है, इसलिए हम यह जानने के लिए कि क्या निम्न रक्तचाप का यह प्रकार दिमाग से खास तौर से डिमेंशिया से जुड़ा है, इसके निर्धारण के लिए विस्तृत शोध करना चाहते हैं.”

इस शोध का प्रकाशन पत्रिका ‘न्यूरोलॉजी’ में किया गया है. इसमें शोध दल ने 11,709 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इसके अलावा कम तीव्रता के अल्ट्रासाउंड तरंगों से भी डिमेंशिया के मरीजों की हालत में सुधार हो सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि कम तीव्रता वाले स्पंदित अल्ट्रासाउंड (एलआईपीयूएस) का चूहों के दिमाग पर इस्तेमाल करने से बिना साइड इफेक्ट ब्लड वेसल निर्माण और तंत्रिका कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में सुधार दिखाई दिया .