डायबिटीज और कोलन कैंसर की बीच क्या है कनेक्शन? डॉक्टर से जानें

डायबिटीज के कारण व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है और मोटापा कोलन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है.

Published date india.com Published: January 8, 2024 10:04 PM IST
डायबिटीज और कोलन कैंसर की बीच क्या है कनेक्शन? डॉक्टर से जानें

मॉडर्न जीवनशैली में बढ़ती हुई बीमारियों में से एक हैं डायबिटीज और कैंसर. सबसे बड़ी चिंता की है कि अब बच्चों को भी डायबिटीज हो रही है. डायबिटीज के चलते कई अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. कई रिसर्च में तो ये भी पाया गया है कि डायबिटीज के मरीज में कोलन कैंसर (Cancer) का खतरा भी बढ़ रहा है. जामा जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन के परिणामों के अनुसार, मधुमेह वाले लोगों में बिना डायबिटीज वालों की तुलना में कोलोरेक्टल (कोलेन) कैंसर होने का जोखिम 47% अधिक हो सकता है.

आज हम डॉ . सनी गर्ग, हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट एंड सीनियर कंसलटेंट, डिपार्टमेंट-मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सनर इंटरनेशनल हॉस्पिटल्ससे जानेंगे कि कैसे डायबिटीज और कोलन कैंसर के बीच एक संबंध हो सकता है और इससे बचने के लिए कैसे सावधान रहा जा सकता है.

डायबिटीज और कोलन कैंसर के बीच संबंध-

शरीर के विभिन्न अंगों में होने वाले कैंसर को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जैसे- मुंह का कैंसर, नाक का कैंसर, गले का कैंसर इत्यादि. इन्हीं कैंसर में से एक है कोलोरेक्टल कैंसर. यह दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला कोलन और दूसरा रेक्टल यानी इस कैंसर की वजह से मरीज के मलाशय (rectum) और कोलन (colon) में कैंसर की कोशिकाएं असीमित रूप से विकसित होने लगती हैं.

डायबिटीज का प्रभाव: डायबिटीज में शरीर का ब्लड शुगर संतुलित रूप से नहीं बनता है, जिससे ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ जाता है. बल्ड में शर्करा के बढ़े हुए स्तर को संतुलित करने के लिए रक्त में इंसुलिन की मात्रा भी बढ़ जाती है. इसे मेडिकल साइंस की भाषा में हाइपरग्लाइसीमिया कहते हैं. हाइपरग्लाइसीमिया कोलोरेक्टल कैंसर होने का कारण होता है. ब्लड में अधिक शुगर होने से शरीर के अनेक हिस्से प्रभावित हो सकते हैं, जिसमें कोलन भी शामिल है.

ओरल दवा और इन्सुलिन का प्रयोग: कई डायबिटीज रोगियों को ओरल दवाएं या इंसुलिन की आवश्यकता होती है जो उनके शरीर के फ़िब्रोम्यल्गिए को प्रभावित कर सकती हैं और आंतों को भी प्रभावित कर सकती हैं.

ज्यादा वजन और विशेष रूप से मोटापा: डायबिटीज के कारण व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है और मोटापा कोलन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है.

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बढ़ा हुआ ब्लड शुगर स्तर: डायबिटीज में अधिक ब्लड शुगर स्तर के कारण कोलन स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे कैंसर के विकास का जोखिम बढ़ सकता है.

कोलन कैंसर के लक्षण-

-लाल या काला मल आना
-सॉलिड खाने के बजाय द्रव युक्त भोजन का चुनाव करना, जो कि इस बात का संकेत है कि बड़ी आंत में विकसित हुआ ट्यूमर रुकावट पैदा कर रहा है
-पेट फूलना, या पेट में पानी भरना
-भूख न लगना
-अचानक वजन घटना

कैंसर के जोखिम को कम करने के तरीके:

नियमित चेकअप और स्क्रीनिंग: डायबिटीज रोगियों को नियमित अंतराल पर कोलन कैंसर स्क्रीनिंग करवानी चाहिए ताकि यदि कोई समस्या हो, तो उसे पहचाना जा सके.

स्वस्थ आहार: उच्च फाइबर वाले आहार का सेवन करें, जैसे कि फल, सब्जियां, और पूरे अनाज

व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करना और शारीरिक सक्रियता को बढ़ाना कैंसर के खतरे को कम कर सकता है

वजन की निगरानी: वजन की निगरानी रखना और मोटापे से बचना डायबिटीज पेशेंट्स के लिए महत्वपूर्ण है

दवा और इलाज का सही तरीके से पालन करना: डायबिटीज रोगियों को अपने डॉक्टर के सुझाव के अनुसार दवाओं का सही तरीके से पालन करना और नियमित रूप से चेकअप करवाना चाहिए.

डायबिटीज रोगियों को कोलन कैंसर का खतरा हो सकता है. डायबिटीज पेशेंट्स को कोलन कैंसर के जोखिम से बचने के लिए नियमित चेकअप, स्वस्थ आहार, व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है.

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