टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज! कैसे होते हैं एक दूसरे से बिलकुल अलग? जानें लक्षण

टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज एकदूसरे से काफी अलग होते हैं. इनके लक्षण और कारण जानकर आप सही तरह इलाज करा सकते हैं.

Published date india.com Updated: January 29, 2025 10:10 AM IST
different symptoms of type-1 diabetes and type-2 diabetes diabetes ke lakshan
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Types of Diabetes: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है. इस बीमारी को लेकर कई भ्रांतियां हैं. जैसे कि कई लोगों का मानना है कि यह बीमारी सिर्फ ज्यादा चीनी खाने से होती है. जबकि ऐसा बिल्कुल सच नहीं है. डायबिटीज कई कारणों से होती है. यह बीमारी दो मुख्य प्रकार की होती है – टाइप 1 और टाइप 2. हालांकि दोनों ही स्थितियों में ब्लड शुगल लेवल बढ़ जाता है, लेकिन इन दोनों के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं, जिनके बारे में हर किसी को जानना चाहिए. आइए जानते हैं इन दोनों प्रकार की डायबिटीज के बारे में विस्तार से.

टाइप 1 डायबिटीज क्या है?

टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देता है. इंसुलिन एक हार्मोन है जो ब्लड शुगल लेवल को कंट्रोल करता है. इस हमले के कारण शरीर में इंसुलिन का उत्पादन कम या बिल्कुल बंद हो जाता है. टाइप-1 डायबिटीज जैनेटिक बीमारी है. यह आपके जीन्स के जरिए परिवार में भी फैल सकता है. छोटे बच्चों में पाया जाने वाला डायबिटीज ज्यादातर टाइप-1 डायबिटीज होता है.

टाइप 2 डायबिटीज क्या है?

टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का उत्पादन तो करता है, लेकिन कोशिकाएं उस इंसुलिन का सही मात्रा में उपयोग नहीं कर पाती हैं. इस वजह से शरीर में ब्लड शुगर लेवल धीरे धीरे बढ़ने लगता है. टाइप-2 डायबिटीज आमतौर पर अस्वस्थ जीवनशैली और मोटापे के कारण होता है. इसमें मरीज अपने खान-पान को नियंत्रण करके डायबिटीज को कंट्रोल कर सकता है.

दोनों प्रकार की डायबिटीज के सामान्य लक्षण

  • ज्यादा प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • ज्यादा भूख लगना
  • थकान
  • धुंधला दिखना
  • बार-बार संक्रमण
  • धीरे-धीरे घाव भरना

टाइप 1 डायबिटीज का उपचार: जीवन भर इंसुलिन इंजेक्शन लेना, स्वस्थ आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और ब्लड शुगर लेवल की नियमित जांच से आप इसको कंट्रोल कर सकते हैं.

टाइप 2 डायबिटीज का उपचार: जीवनशैली में बदलाव, व्यायाम, खान-पान में नियंत्रण जैसी चीजें आपको इससे बचा सकती हैं. शुगर लेवल ज्यादा बढ़ने पर आप इंसुलिन इंजेक्शन या दवाईयों की भी मदद ले सकते हैं.

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे केवल सुझाव के तौर पर लें. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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