एक जैसे ब्लड ग्रुप वाले कपल्स को प्रेग्नेंसी में आती है दिक्कत? आइए डॉक्टर से जानते हैं क्या है सच

आपने कई बार सुना होगा कि सेम ब्लड ग्रुप वाले कपल को बच्चा पैदा करने में दिक्कत आती है, लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है ये किसी को पता नहीं तो चलिए इसका जवाब डॉक्टर से जानते हैं.

Published date india.com Published: July 18, 2025 8:50 AM IST
एक जैसे ब्लड ग्रुप वाले कपल्स को प्रेग्नेंसी में आती है दिक्कत? आइए डॉक्टर से जानते हैं क्या है सच

मां बनने का सपना हर किसी महिला का होता है. हालांकि इस दौरान माता-पिता को तरह की चीजों से गुजरना पड़ता है. जैसे कई बार ये भी सुनने को मिलता है कि सेम ब्लड ग्रुप वाले कपल को बच्चा पैदा करने में दिक्कत आती है, ऐसे में अक्सर लोग शादी से पहले खून की जांच कराने पर जोर देते हैं, लेकिन इस बात में क्या वाकई कोई सच्चाई है आइए डॉ. पल्लवी वसल ( क्लिनिकल डायरेक्टर- आब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल गुरुग्राम) से जानते हैं.

  • बच्चे पर पड़ सकता है असर-

डॉ. पल्लवी वसल ने बताया कि ऐसा कहीं भी किसी भी स्टडी में ऐसा प्रूवन नहीं है कि अगर हस्बैंड और वाइफ दोनों के सेम ब्लड ग्रुप हैं तो उनको कन्सीव करने में या बच्चा होने में दिक्कत आएगी लेकिन कुछ टेस्ट होते हैं जो कि हम हमेशा एडवाइस करते हैं अगर आप शादी प्लान कर रहे हैं तो अगर आप वो टेस्ट करवाएं, कुछ अगर जेनेटिक डिजीज आपके शरीर में है, जो चांसेस है कि आप बेबी को पास कर सकते हैं, अगर सेम जेनेटिक डिजीज, हस्बैंड और वाइफ दोनों में है तो ज़्यादा चांसेस हो सकते हैं कि बच्चे को वो जेनेटिक डिजीज मेजर फॉर्म में हो.

  • इन बातों पर दें ध्यान-

दूसरी चीज है कि अगर हस्बैंड और वाइफ का ब्लड ग्रुप, एक का पॉजिटिव, एक का नेगेटिव, स्पेशली अगर वाइफ का नेगेटिव है, तो कुछ प्रिकॉर्शिन्स जैसे ही वो कन्सीव करती हैं, तो कुछ टेस्ट करवाने पड़ते हैं और इंजेक्शन देने पड़ते हैं , इसलिए ब्लड ग्रुप की इम्पोर्टेंस होती है और कुछ टेस्ट करे जाते हैं, जैसा कि हमने आपको बताया कि कोई भी जेनेटिक डिजीज या फिर एचाईवी,हेपेटाइटिस बी , हेपेटाइटिस सी , ऐसी कोई डिजीज जो वाइफ या हस्बैंड के शरीर में है तो उन्हें पता करने के लिए टेस्ट किए जाते हैं तो इसलिए जो डॉक्टर्स हैं, वो थोड़ा सा आपको स्ट्रेस देते हैं, कि आप अपने टेस्ट कराएं.

डॉ. पल्लवी वसल ने कहा कि जैसे आप लोग पत्रिका मिलवाते हैं, वैसे आप बलड टेस्ट भी करवाएं, तो ये जानने के लिए कि कुछ ऐसा तो नहीं है, जो हम फ्यूचर जेनेरेशन को पास कर देंगे और जेनेटिक डिजीज जैसे थैलेसीमिया ये बहुत कॉमन है. थैलेसीमिया माइनर बहुत कॉमन होता है और ये पता ही नहीं लगता इन लोगों का हीमोग्लोबिन बॉर्डर लाइन रहता है. अगर हस्बैंड और वाइफ दोनों थैलेसीमिया माइनर हैं तो चान्सेस होते हैं कि बच्चे को भी ये बीमारी हो जाए. ऐसे कई और भी डिजीज होती हैं जो माइनर फॉर्म में होती हैं और पता नहीं लगती हैं, लेकिन अगर दोनों जीन कैरी करें तो बच्चे में मेजर फॉर्म में वो मैनिफेस्ट हो जाती हैं तो वो बच्चे के लिए प्रॉब्लमैटिक होती हैं तो इन सब चीजों से बचने के लिए और इसके लिए हम क्या-क्या प्रिकॉर्शन्स दे सकते हैं कुछ टेस्ट और इन्वेस्टीगेशन कर सकते हैं जिसमे बच्चे को दिक्कत ना आए.

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