
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
हर महिला मां बनने की चाह रखती है. हालांकि कई बार कुछ परेशानियों के चलते महिलाएं नैचुरली कंसीव नहीं कर पाती हैं. ऐसे में वो IVF का सहारा लेती हैं, आज कई लोग इसका सहारा ले रहे हैं. हालांकि इसे लेकर आज भी समाज में कई तरह की बातें होती हैं, कुछ लोग कहते हैं कि IVF के दौरान पूरे 9 महीने बेड रेस्ट करना पड़ता है, लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है आइए डॉ. काजल सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, ग्रेटर नोएडा) से जानते हैं.
डॉ. काजल सिंह ने बताया कि IVF को लेकर कई बातें गलत तरीके से फैली हुई हैं. IVF एक इलाज है, जिसमें महिला के अंडे और पुरुष के स्पर्म को बाहर मिलाकर बच्चा बनने की शुरुआत की जाती है. इसके बाद बने हुए भ्रूण को महिला के गर्भाशय में रखा जाता है. यह तरीका उन कपल्स के लिए होता है, जिन्हें बच्चा होने में परेशानी होती है.
क्या IVF में पूरे 9 महीने बेड रेस्ट जरूरी है?
डॉ. काजल सिंह ने बताया नहीं, बिल्कुल नहीं. IVF के बाद पूरे 9 महीने बेड पर लेटे रहने की ज़रूरत नहीं होती. भ्रूण डालने के बाद डॉक्टर आमतौर पर 1 या 2 दिन आराम करने को कहते हैं. उसके बाद महिला धीरे-धीरे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी कर सकती है, जैसे हल्का चलना, घर का काम या ऑफिस का हल्का काम, बहुत ज़्यादा बेड रेस्ट करने से शरीर कमजोर हो सकता है और मन भी परेशान रहने लगता है. हां, अगर किसी महिला को कोई खास दिक्कत हो, तो डॉक्टर थोड़ा ज़्यादा आराम की सलाह दे सकते हैं.
क्या IVF में बहुत सारे इंजेक्शन लगते हैं?
IVF में इंजेक्शन लगते हैं, लेकिन इतने नहीं कि डर जाएं. ये इंजेक्शन शरीर में अंडे अच्छे से बनने के लिए दिए जाते हैं. कुछ दिनों तक रोज़ छोटे-छोटे इंजेक्शन लगते हैं. ये ज़्यादा दर्दनाक नहीं होते और कई महिलाएं इन्हें घर पर ही लगवा लेती हैं. हर महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए इंजेक्शन की संख्या भी अलग हो सकती है.
IVF के बाद क्या सावधानी रखें?
IVF के बाद सही खाना, पूरी नींद और हल्की एक्सरसाइज बहुत जरूरी होती है. रोज थोड़ा टहलना अच्छा रहता है. बहुत भारी काम, वजन उठाना, धूम्रपान और शराब से बचना चाहिए, जो दवाएं डॉक्टर दें, वही समय पर लें.
तनाव कम रखना क्यों जरूरी है?
IVF के दौरान चिंता होना आम बात है, लेकिन ज़्यादा सोचने से नुकसान हो सकता है. परिवार का साथ, सकारात्मक सोच और डॉक्टर से खुलकर बात करना बहुत मदद करता है. IVF कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक इलाज है.
IVF में पूरे 9 महीने बेड रेस्ट की ज़रूरत नहीं होती और इंजेक्शन भी कुछ ही समय के लिए होते हैं. सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह से IVF के ज़रिए स्वस्थ गर्भ ठहरना संभव है. किसी भी शक या डर में खुद से फैसले न लें, हमेशा डॉक्टर से सलाह लें.
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