Does Pollution Increase The Risk Of Silent Stroke Learn About Its Risks From Your Doctor
प्रदूषण से दिमाग पर साइलेंट अटैक! बिना लक्षणों के बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा, एक्सपर्ट ने बताए बचाव के उपाय
आजकल प्रदूषण के चलते कई गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इसमें से एक है साइलेंट स्ट्रोक की समस्या, ऐसे में आइए जानते हैं इसके लक्षण और बचाव के तरीके.
आजकल शहरों में बढ़ता प्रदूषण सिर्फ सांस की बीमारी या आंखों की जलन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग पर भी गहरा असर डाल रहा है. जीवन कसारा (डायरेक्टर एंड सीईओ, स्टेरिस हेल्थकेयर) ने बताया कि ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में रहने वाले लोगों में साइलेंट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. सबसे खतरनाक बात यह है कि साइलेंट स्ट्रोक के लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, इसलिए लोग समय पर इसे पहचान नहीं पाते.
साइलेंट स्ट्रोक क्या होता है?
साइलेंट स्ट्रोक एक ऐसा स्ट्रोक होता है जिसमें दिमाग की नसों में खून का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक जाता है या बहुत कम हो जाता है. इसमें आम स्ट्रोक की तरह हाथ-पैर सुन्न होना या बोलने में दिक्कत जैसे तेज लक्षण नहीं दिखते. इसलिए इसे साइलेंट यानी चुपचाप होने वाला स्ट्रोक कहा जाता है, लेकिन यह दिमाग को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता रहता है.
प्रदूषण और साइलेंट स्ट्रोक का क्या संबंध है?
डॉक्टर बताते हैं कि हवा में मौजूद बारीक कण, जैसे PM2.5 और PM10, सांस के जरिए शरीर में जाते हैं. ये कण खून में मिलकर सूजन पैदा करते हैं और खून को गाढ़ा बना सकते हैं. इससे दिमाग तक जाने वाली नसों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है. लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है, जो साइलेंट स्ट्रोक के बड़े कारण हैं.
किसे ज्यादा खतरा होता है?
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40 साल से ज्यादा उम्र के लोग
हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
डायबिटीज और दिल की बीमारी वाले लोग
स्मोकिंग करने वाले
ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में रहने या काम करने वाले लोग
डॉक्टरों के अनुसार, आजकल कम उम्र के लोगों में भी प्रदूषण के कारण साइलेंट स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं।
साइलेंट स्ट्रोक के छुपे हुए लक्षण-
हालांकि इसके लक्षण साफ नहीं होते, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
याददाश्त कमजोर होना
बार-बार ध्यान भटकना
बिना वजह थकान
चलने में संतुलन बिगड़ना
व्यवहार या मूड में बदलाव
अगर ये लक्षण धीरे-धीरे बढ़ रहे हों, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है
साइलेंट स्ट्रोक क्यों है खतरनाक?
डॉक्टर कहते हैं कि एक साइलेंट स्ट्रोक के बाद दूसरा स्ट्रोक होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. यह धीरे-धीरे दिमाग की कार्यक्षमता कम कर सकता है, जिससे डिमेंशिया, याददाश्त की समस्या और चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है. कई बार MRI जांच में ही इसका पता चलता है.
बचाव के लिए क्या करें?
प्रदूषण ज्यादा हो तो बाहर निकलते समय मास्क पहनें
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच कराएं
नमक और तले हुए खाने से बचें
रोज हल्की एक्सरसाइज या योग करें
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
AQI ज्यादा होने पर सुबह की सैर से बचें
प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों का ही नहीं, बल्कि दिमाग का भी दुश्मन है. साइलेंट स्ट्रोक बिना चेतावनी के नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए जागरूक रहना, समय पर जांच कराना और साफ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है. सही समय पर सावधानी बरतकर इस गंभीर खतरे से खुद को बचाया जा सकता है.
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