क्या वाकई में रेबीज में कुत्ते की तरह भौंकने लगता है इंसान? डॉक्टर से जानें पूरा सच

आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा कि रेबीज होने पर इंसान कुत्तों की तरह भौंकने लगता है, लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है ये अधिकतर लोगों को नहीं पता होता है तो चलिए डॉक्टर से जानते हैं.

Published date india.com Published: March 11, 2026 9:08 AM IST
क्या वाकई में रेबीज में कुत्ते की तरह भौंकने लगता है इंसान? डॉक्टर से जानें पूरा सच

रेबीज एक खतरनाक बीमारी है, आपने अक्सर सुना होगा कि अगर किसी को रेबीज हो जाए तो वह ‘कुत्ते जैसा व्यवहार’ करने लगता है. कई लोग यह भी कहते हैं कि मरीज भौंकने लगता है या पानी देखकर डर जाता है. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? या यह सिर्फ एक गलतफहमी है? आइए इस बात का सच डॉ. सुमोल रत्ना (सहायक प्रोफेसर, चिकित्सा विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, ग्रेटर नोएडा) से जानते हैं.

रेबीज क्या है?

रेबीज एक जानलेवा बीमारी है. यह Rabies Virus के कारण होती है. यह वायरस आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने से इंसान के शरीर में प्रवेश करता है. सबसे ज्यादा रेबीज का खतरा कुत्ते के काटने से होता है, लेकिन यह बीमारी बंदर, बिल्ली, चमगादड़ या लोमड़ी जैसे जानवरों से भी फैल सकती है. रेबीज एक बार गंभीर अवस्था में पहुंच जाए, तो यह लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है. इसलिए इसे हल्के में लेना बिल्कुल भी सही नहीं है.

क्या रेबीज में इंसान कुत्ते जैसा बन जाता है?

डॉ. सुमोल रत्ना ने बताया कि ये पूरी तरह से गलत है, इस बीमारी में इंसान सच में कुत्ते की तरह भौंकने या चार पैरों पर चलने नहीं लगता. यह एक मिथ (गलत धारणा) है, लेकिन हां, रेबीज दिमाग पर असर करता है, जिससे मरीज के व्यवहार में बदलाव आ सकता है. रेबीज वायरस नसों (nerves) के जरिए दिमाग तक पहुंचता है और वहां सूजन पैदा करता है. इसी वजह से मरीज को अजीब हरकतें, घबराहट, बेचैनी और डर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यही बदलाव लोगों को कुत्ते जैसा व्यवहार लगते हैं.

रेबीज कैसे फैलता है?

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  • रेबीज आमतौर पर इन तरीकों से फैलता है:
  • संक्रमित कुत्ते के काटने से
  • जानवर के नाखून से खरोंच लगने से
  • जानवर की लार (saliva) का खुले घाव या आंख, नाक, मुंह में जाना
  • बहुत दुर्लभ मामलों में अंग प्रत्यारोपण से
  • याद रखें – सिर्फ छूने या पास बैठने से रेबीज नहीं फैलता

रेबीज के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

रेबीज के लक्षण तुरंत नहीं दिखते. कभी-कभी 10 दिन में, तो कभी 2–3 महीने बाद लक्षण शुरू होते हैं. इसे Incubation Period कहते हैं.

शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे होते हैं:

  • हल्का बुखार
  • सिरदर्द
  • कमजोरी
  • उल्टी या जी मिचलाना
  • काटे हुए स्थान पर झनझनाहट या जलन

इस स्टेज पर बीमारी को पहचानना मुश्किल होता है

रेबीज के गंभीर लक्षण क्या होते हैं?

जब वायरस दिमाग तक पहुंच जाता है, तब लक्षण गंभीर हो जाते हैं

1. पानी से डर (Hydrophobia)-

रेबीज का सबसे खास लक्षण है – पानी से डर लगना. मरीज को पानी देखते ही गले में ऐंठन और घबराहट होने लगती है. यह इसलिए होता है क्योंकि पानी पीते समय गले की मांसपेशियों में तेज दर्द और स्पाज्म होता है.

2. हवा से डर (Aerophobia)

हल्की हवा लगने पर भी मरीज को बेचैनी या झटके महसूस हो सकते हैं

3. ज्यादा उत्तेजना

मरीज अचानक गुस्से में आ सकता है या बेचैन हो सकता है

4. भ्रम और मतिभ्रम (Hallucination)

मरीज को ऐसी चीजें दिख सकती हैं जो असल में नहीं होतीं

5. लकवा (Paralysis)

कुछ मामलों में शरीर के हिस्से धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं

6. कोमा और मौत

अगर इलाज न मिले, तो मरीज कोमा में जा सकता है और जान भी जा सकती है

क्या हर कुत्ते के काटने से रेबीज होता है?

डॉक्टर बताती हैं कि ऐसा नहीं है. हर कुत्ता रेबीज से संक्रमित नहीं होता.

लेकिन अगर कुत्ता:

  • अजीब व्यवहार कर रहा हो
  • मुंह से झाग निकाल रहा हो
  • बिना कारण काट रहा हो
  • ज्यादा आक्रामक या बहुत सुस्त हो
  • तो खतरा ज्यादा हो सकता है
  • इसलिए किसी भी कुत्ते के काटने को हल्के में नहीं लेना चाहिए

कुत्ते के काटने के तुरंत बाद क्या करें?

अगर किसी को कुत्ते ने काट लिया है, तो तुरंत ये कदम उठाएं:

1. घाव को धोएं

घाव को कम से कम 10–15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं. यह सबसे जरूरी और पहला इलाज है

2. एंटीसेप्टिक लगाएं

पॉविडोन आयोडीन या कोई एंटीसेप्टिक लगाएं

3. डॉक्टर के पास जाएं

जितनी जल्दी हो सके अस्पताल जाएं और Anti-Rabies Vaccine (ARV) लगवाएं

4. टिटनेस इंजेक्शन

डॉक्टर टिटनेस और जरूरत पड़ने पर Rabies Immunoglobulin भी दे सकते हैं

क्या रेबीज का इलाज है?

यह बहुत महत्वपूर्ण सवाल है

सच्चाई यह है कि:

अगर लक्षण शुरू हो जाएं, तो रेबीज का इलाज लगभग नामुमकिन है

लेकिन अगर काटने के तुरंत बाद वैक्सीन लग जाए, तो बीमारी को रोका जा सकता है

यानी रेबीज से बचाव संभव है, लेकिन देर होने पर इलाज मुश्किल हो जाता है

रेबीज वैक्सीन कैसे काम करती है?

Anti-Rabies Vaccine शरीर में एंटीबॉडी बनाती है, जो वायरस को दिमाग तक पहुंचने से पहले ही रोक देती है. आमतौर पर 4–5 डोज दी जाती हैं, जो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर लगवानी जरूरी हैं

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

बच्चे (क्योंकि वे जानवरों के साथ ज्यादा खेलते हैं)

  • पशु चिकित्सक
  • डॉग केयर स्टाफ
  • स्ट्रीट डॉग्स के संपर्क में रहने वाले लोग

पालतू कुत्तों के लिए क्या करें?

अगर आपके घर में कुत्ता है:

  • उसे समय पर Rabies Vaccine लगवाएं
  • नियमित चेकअप कराएं
  • बाहर के जानवरों से संपर्क सीमित रखें
  • समाज में फैली गलत धारणाएं
  • रेबीज में इंसान कुत्ता बन जाता है
  • जूता सूंघाने से ठीक हो जाता है
  • झाड़-फूंक से इलाज हो सकता है
  • छोटा घाव है तो खतरा नहीं

ये सभी बातें गलत हैं. रेबीज एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसका इलाज सिर्फ डॉक्टर ही कर सकते हैं

रेबीज से बचाव कैसे करें?

  • स्ट्रे डॉग्स से दूरी रखें
  • बच्चों को सिखाएं कि अजनबी कुत्तों को न छुएं
  • काटने पर तुरंत घाव धोएं
  • वैक्सीन में देरी न करेंf
  • पालतू जानवरों का टीकाकरण जरूर कराएं

रेबीज एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही समय पर कदम उठाकर इसे पूरी तरह रोका जा सकता है. इंसान सच में कुत्ते जैसा नहीं बनता, लेकिन दिमाग पर असर होने की वजह से व्यवहार बदल सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि कुत्ते के काटने को कभी हल्के में न लें तुरंत घाव धोना और समय पर वैक्सीन लगवाना ही जीवन बचाने का सबसे बड़ा तरीका है. जागरूकता, सतर्कता और सही जानकारी ही रेबीज से बचाव की असली चाबी है.

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