
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
आज के समय में थाइरॉइड आम समस्या बन चुकी है. हमारा शरीर काफी पहले ही थाइरॉइड के लक्षण बताने लगता है, मगर हम अपनी लापरवाही के कारण उन लक्षणों को नरजअंदाज कर देते हैं. इससे थाइरॉइड अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है जो शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है. थाइरॉइड ग्लैंड गले में मौजूद होता है. थाइरॉइड ग्लैंड कई सारे हार्मोंस की प्रोड्यूस करता है, जो शरीर के विकास के लिए जरूरी होते हैं.
जब थाइरॉइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाए तब आपके शरीर में मेटाबॉलिजम काफी बढ़ जाता है, जिससे दुबलेपन जैसी कई समस्याएं आने लगती हैं. दूसरी तरफ जब थाइरॉइड ग्लैंड कम एक्टिव होने लगे, तब आपका मेटाबॉलिजम स्लो होने लगता है, जिससे आप मोटापे का शिकार होते हैं. आज हम जानेंगे कि थाइरॉइड होने से पहले शरीर किस तरह के संकेत देने लगता है.
कई लोगों को लगता है कि ब्रेन फॉग हमारे आसपास होने वाले कुछ घटनाओं के कारण होता है. मगर इसके पीछे हमारे हार्मोंस का सबसे बड़ा हाथ होता है. हमारे गले में मौजूद थाइरॉइड ग्लैंड दिमाग को हार्मोंस भेजता है. मगर हाइपोथाइरॉइडिज्म उन हार्मोंस के फ्लो को कम कर देता है. इससे हमारे दिमाग को ध्यान केंद्रित करने, चीजें याद रखने और क्लियर थिकिंग करने में परेशानी महसूस होती है. जिसके कारण लोगों को ब्रेन फॉग की समस्या होती है.
हाइपोथाइरॉइडिज्म दिमाग तक उन हार्मोंस पहुंचाने के लिए रुकावट पैदा करता है, जिससे लोगों को मेंटल क्लैरिटी नहीं होती है. इसी कारण से लोग चिड़चिड़े और मूडी स्वभाव के होने लगते हैं. अगर आपको मूड स्विंग की समस्या काफी ज्यादा है, तो आप एकबार थाइरॉइड चेकअप जरूर कराएं.
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थाइरॉइड की समस्या ज्यादा पाई जाती है. अगर आपका थाइरॉइड ग्लैंड सही तरह से काम नहीं कर रहा है, तो इसका साफ मतलब है कि आपके शरीर में हार्मोंस का सही तरह से संचालन नहीं हो रहा है. जब सही तरह से हार्मोंस नहीं फ्लो करते हैं, तब महिलाओं को पीरियड्स से जुड़ी कई सारी परेशानियां होती हैं. महिलाओं के रेगुलर पीरियड्स में दिक्क्त महसूस होती है.
थाइरॉइड की चपेट में आए लोगों को शरीर के अंदर सूजन से भी लड़ना पड़ता है. थाइरॉइड के लक्षणों में से एक है कि शरीर के कई हिस्सों में आपको सूजन देखने को मिलेगी.
प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाओं को थाइरॉइड की समस्या हो जाती है. दरअसल, प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का शरीर बड़े परिवर्तन से गुजरता है, जिसमें उसके शरीर में हार्मोंस से जुड़े कई बदलाव होते हैं. थाइरॉइड होने पर गर्भपात होने या स्टिलबर्थ होने के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं. ऐसे में कई बार महिला प्रीमेच्योर बेबी को जन्म दे देती है. ऐसे समय में महिला का खास ख्याल रखना चाहिए.
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे केवल सुझाव के तौर पर लें. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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