टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में क्या फर्क होता है? क्या होता है इन दोनों के बीच का अंतर?

Type 1 Diabetes Vs Type 2 Diabetes: डायबिटीज दो प्रकार की होती है, टाइप 1 और टाइप 2. कई लोग इन दोनों डायबिटीज के बीच का फर्क नहीं जानते होंगे. बता दें कि इन दोनों के बीच काफी बड़ा अंतर होता है. आइए जानते हैं.

Published date india.com Published: December 8, 2025 2:47 PM IST
Difference Between Type 1 and Type 2 Diabetes
Difference Between Type 1 and Type 2 Diabetes

Type 1 vs Type 2 Diabetes: डायबिटीज एक आम बीमारी है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है. यह दो मुख्य प्रकारों में बंटी होती है: टाइप 1 और टाइप 2. दोनों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, लेकिन उनके कारण, लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं. इस लेख में हम सरल शब्दों में समझेंगे कि इन दोनों में क्या अंतर है.

टाइप 1 डायबिटीज क्या है?

टाइप 1 डायबिटीज काफी खरतनाक होती है. इसमें शरीर के अंदर इंसुलिन नामक हार्मोन नहीं बना पाता. बता दें कि इंसुलिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है. टाइप-1 डायबिटीज की बीमारी आमतौर पर बचपन या युवावस्था में शुरू होती है. इसका मुख्य कारण शरीर की रक्षा प्रणाली है जो गलती से पैंक्रियास की कोशिकाओं पर हमला कर देती है, जहां इंसुलिन बनता है. इस प्रकार के डायबिटीज मरीज को हमेशा इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है. थोड़ी भी देर करने पर हालत भी खराब हो सकता है. यह कुल डायबिटीज मामलों का सिर्फ 5-10% हिस्सा है. बच्चों में इस टाइप की डायबिटीज ज्यादा देखी जाती है. इसके लक्षणों में अचानक वजन कम होना, ज्यादा प्यास लगना और थकान शामिल हैं. इस तरह की डायबिटीज काफी हद तक आपके जेनेटिक्स पर भी निर्भर करती है.

टाइप 2 डायबिटीज क्या है?

टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन तो बनाता है, लेकिन उसे सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता. इसे इंसुलिन रेसिस्टेंस कहते हैं. कभी-कभी पैंक्रियास पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता. यह बीमारी ज्यादातर वयस्कों में होती है, लेकिन मोटापा, कम व्यायाम और खराब खान-पान के कारण युवाओं में भी बढ़ रही है. इसका मुख्य कारण खराब लाइफस्टाइल और तनाव होता है. इसमें जातीयता और उम्र भी जोखिम बढ़ाते हैं. यह कुल डायबिटीज मामलों का 90-95% हिस्सा है. इलाज में स्वस्थ आहार, व्यायाम, दवाइयां और कभी-कभी इंसुलिन शामिल होता है. वहीं इसके लक्षण धीरे-धीरे आते हैं, जैसे कि ज्यादा पेशाब आना, घाव न भरना और दृष्टि धुंधली होना. इनको बिल्कुल इग्नोर ना करें.

दोनों में मुख्य अंतर

टाइप 1 और टाइप 2 के बीच सबसे बड़ा फर्क कारण में है. टाइप 1 ऑटोइम्यून बीमारी है, जहां शरीर खुद को नुकसान पहुंचाता है. ये आनुवाशिंक भी होती है. वहीं टाइप 2 जीवनशैली से जुड़ी है, जैसे ज्यादा वजन, कम व्यायाम और खराब खान-पान की वजह से टाइप-2 डायबिटीज हो जाती है. ये डायबिटीज ज्यादातर व्यस्कों में देखी जाती है और एक उम्र पार कर लेने के बाद होती है. टाइप 1 में इंसुलिन उत्पादन बंद हो जाता है, जबकि टाइप 2 में उत्पादन होता है लेकिन प्रभाव कम होता है. टाइप 1 अचानक शुरू होती है, जबकि टाइप 2 धीरे-धीरे विकसित होती है.

कारण और जोखिम

टाइप 1 के कारण ज्यादातर आनुवंशिक और पर्यावरणीय होते हैं, जैसे वायरस संक्रमण. यह परिवार में कम चलती है. टाइप 2 में मोटापा, उम्र बढ़ना, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ जातियां (जैसे एशियाई या अफ्रीकी) ज्यादा जोखिम बढ़ाती हैं.

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लक्षण

डायबिटीज होने से पहले कुछ खास लक्षण शरीर में जरूर दिखाई पड़ते हैं. जैसे कि दोनों में थकान, ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और वजन कम होना जैसे लक्षण समान हैं. लेकिन टाइप 1 में लक्षण जल्दी और तेजी से दिखते हैं, जबकि टाइप 2 में सालों तक छिपे रह सकते हैं.

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे केवल सुझाव के तौर पर लें. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. (Images: Pinterest)

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