आज के समय में मायोपिया बच्चों में एक आम समस्या बन गई है. आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में हर तीसरे बच्चे को यह आंखों की बीमारी हो रही है. मायोपिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति पास की चीजें तो साफ देख सकता है, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं. डॉ. विशाल अरोड़ा (सीनियर कंसलटेंट – ऑप्थल्मोलॉजी , मैक्स हॉस्पिटल गुडगांव) ने बताया कि इसका कारण आंख के स्ट्रक्चर में परिवर्तन होता है, जिससे लाइट आंख के अंदर ठीक से केंद्रित नहीं हो पाती.
मायोपिया के लक्षण:
दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देना: बच्चे को दूर की चीजों को देखने में कठिनाई होती है, जैसे कि स्कूल की ब्लैकबोर्ड या टीवी.
अक्सर सिरदर्द होना: लगातार आंखों पर दबाव पड़ने के कारण सिरदर्द की समस्या हो सकती है.
आंखों में तनाव या थकान: लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने के कारण आंखों में थकान महसूस हो सकती है.
आंखों को बार-बार मलना: बच्चे अक्सर अपनी आंखों को मसलते रहते हैं, क्योंकि वे साफ नहीं देख पाते.
स्क्रीन के पास बैठना: बच्चे टीवी या मोबाइल को बहुत पास से देखने लगते हैं.
मायोपिया के कारण:
जेनेटिक कारण: यदि माता-पिता में से किसी को मायोपिया है, तो बच्चों में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है.
स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल: आजकल बच्चे मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी के सामने ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे आंखों पर दबाव बढ़ता है.
बाहर खेलने की कमी: बच्चों का बाहर कम समय बिताना और नेचुरल रोशनी की कमी भी मायोपिया का कारण बन सकती है.
कैसे करें बचाव –
स्क्रीन टाइम कम करें: बच्चों के स्क्रीन के सामने बिताए समय को नियंत्रित करें और बीच-बीच में ब्रेक लेने को कहें.
आंखों की रेगुलर जांच करवाएं : नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं, ताकि समय रहते समस्या का पता चल सके.
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बाहर खेलने का समय बढ़ाएं: बच्चों को रोजाना कुछ समय धूप में खेलने के लिए प्रेरित करें, इससे आंखों को प्राकृतिक रोशनी मिलती है.
सही रोशनी में पढ़ाई: बच्चे जब भी पढ़ाई करें, तो पर्याप्त रोशनी में बैठें और किताब को आंखों से उचित दूरी पर रखें.
स्वस्थ आहार: विटामिन ए से भरपूर आहार, जैसे गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां, और फलों का सेवन आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है.
अगर आपके बच्चे को मायोपिया के लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क कर जल्द से जल्द उचित इलाज शुरू करें.
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