हैदराबाद: अंडों के उत्‍पादन में तेलंगाना देशभर में तीसरे स्‍थान पर आता है. तेलंगाना में उत्‍पादित अंडे दिल्‍ली तक भेजे जाते हैं. लेकिन पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी (PGBA) के छात्रों के खाने के लिए जापान से अंडा मंगाया जा रहा है. जी हां, भले ही तेलंगाना में अंडों का बड़े स्‍तर पर उत्‍पादन हो रहा है, लेकिन गोपीचंद को देसी या कह लें कि तेलंगाना के अंडों पर भरोसा नहीं है. तभी तो उन्‍होंने अपने बैडमिंटन खिलाड़ियों के खाने के लिए जापान से अंडा मंगाना शुरू कर दिया है.

इसके लिए सोमवार को बकायदा गोपीचंद के PGBA और जापान की इसे फूड्स कंपनी के बीच एमओयू साइन किया गया है. एमओयू के अनुसार जापान की ‘इसे फूड्स’ कंपनी साल 2020 में होने वाले टोक्‍यो ओलंपिक्‍स तक प्रीमियम अंडो की सप्‍लाई करेगी.

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यह बात सुनकर आपके मन में जाहिर तौर पर यह सवाल उठ रहा होगा कि तेलंगाना के अंडों में क्‍या बुराई है और जापानी अंडों में ऐसी कौन सी खास बात है, जिसे देखकर पुलेला गोपीचंद ने यह तय किया है कि उनके छात्र जापानी अंडे ही खाएंगे. बता दें कि तेलंगाना में साल 2016-17 के दौरान 1,181 करोड़ अंडों का उत्‍पादन हुआ, जिसके बाद तेलंगाना देश का तीसरा सबसे बड़ा अंडों उत्‍पादक देश बन गया है. इन आंकड़ों को केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है.

जापानी अंडे में क्‍या होगा खास

जापानी कंपनी इसे फूड्स PGBA को जो प्रीमियम अंडे सप्‍लाई करेगी, उससे एकेडमी के छात्रों के खाने में पोषक तत्‍वों का स्‍तर बढ़ जाएगा. इसे विशेष तौर से Tokyo Olympics, 2020 को ध्‍यान में रख कर दिया जा रहा है. Ise Foods की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार उनके अंडों का उत्‍पादन इकोसापैनटोइनिक एसिड, डोकोसैक्सिनोइक अम्ल, अल्‍फा-लिनोलेनिक एसिड, कोएंजाइम Q 10 और अराचीडोनिक एसिड के साथ किया जाता है. ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार कंपनी सभी अंडों का प्रोडक्‍शन एंटीऑक्‍सीडेंट खूबियों वाले Astaxanthin के साथ किया जाता है.

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बताते चलें कि पिछले साल अमेरिका सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्‍स, इकोनोमिक्‍स और पॉलिसी ने पाया था कि भारत के पॉल्‍ट्री फर्मों में एंटीबायोटिक्‍स का इस्‍तेमाल किया जाता है, जो सेहत से सीधे तौर पर खिलवाड़ है. साल 2016 की यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद की एक स्‍टडी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया था कि राज्‍य में चल रहे पॉल्‍ट्री फर्मों की मुर्ग‍ियों में फ्लूरोक्‍यूनोलोन्‍स, सेफालोसपोरिन्‍स, सल्‍फोनामाइड्स और मैक्रोलाइड्स नाम का एंटीबायोटिक्‍स का इस्‍तेमाल किया जाता है. इन मुर्ग‍ियों में H.pullorum नाम की बैकटीरिया भी पाई गई थी, जो जानवरों से इंसानों में चली जाती है और इंफेक्‍शन का कारण बनती है.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार Ise Foods ने बताया कि कंपनी अपने अंडों के उत्‍पादन में एंटीबायोटिक्‍स का इस्‍तेमाल नहीं करती. अपनी मुर्गीयों को वह किसी भी प्रकार का एंटीबायोटिक का डोज नहीं देती. अगर कोई ऐसा मामला सामने आता है तो कंपनी उन पक्ष‍ियों को एंटीबायोटिक्‍स देने की बजाय उन्‍हें छांट देती है.