नई दिल्ली: एक तरफ पूरी दुनिया चीन से निकले कोरोना वायरस के प्रकोप से सहमी हुई है. वहीं दूसरी तरफ चीन में एक नए वायरस ने जन्म ले लिया है. इस वायरस का नाम है हंतावायरस (Hantavirus). इस वायरस से चीन में पहली मौत दर्ज की गई है. चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर में अब तक 16 हजार लोगों की जानें जा चुकी हैं. बता दें कि पूरा मामला चीन के युन्नान प्रांत का है. पीड़‍ित व्‍यक्ति काम करने के लिए बस से शाडोंग प्रांत लौट रहा था. उसे हंता वायरस से पॉजिटिव पाया गया था. बस में सवार 32 अन्‍य लोगों की भी जांच की गई है. चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स के इस घटना की जानकारी देने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है. Also Read - COVID-19: हांगकांग ने भारत से आने वाली फ्लाइट्स कल से 3 मई तक के लिए स्थगित कीं

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हंता वायरस की संख्या में कमी के कारण इंक्यूबेशन टाइम का अभी सही से पता नहीं चल सका है लेकिन सीमित जानकारी के आधार पर ऐसा पता लगाया गया है कि इस वायरस से संक्रमित लोगों में इसके लक्ष्ण को विकसित होने में 1 से 8 हफ्ते तक का समय लग सकता है. यह वायरस ताजा यूरिन, लार, या फिर संक्रमित कीड़े-मकौडे और चूहों के संपर्क में आने से फैलता है. Also Read - Covid 19 Cases In Rajasthan: राजस्थान में लॉकडाउन जैसे नियम, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस

हंता वायरस के शुरुआती लक्षण

हंता वायरस के चपेट में पर सबसे पहले आपको थकान, बुखार और मांसपेशियों में दर्द का एहसास होगा. साथ ही शरीर के बड़े मांसपेशी समूहों जैसे- जांघों कूल्हों, पीठ, और कभी-कभी कंधे में दर्द हो सकता है. यह हंता वायरस का प्रारंम्भिक लक्षण है. वायरस से संक्रमित होने पर सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, और पेट की समस्याएं, जैसे मतली, उल्टी, दस्त और पेट में दर्द भी हो सकता है. सभी एचपीएस (Hantavirus pulmonary syndrome) रोगियों में से लगभग आधे लोग इन लक्षणों का अनुभव करते हैं.

अन्य लक्षण

बीमारी के प्रारंभिक चरण के चार से 10 दिन बाद, हंता वायरस के लक्षण देर से दिखाई देते हैं. इनमें खांसी और सांस की तकलीफ शामिल है. इस दौरान आपको कफ की समस्या भी आ सकती है. साथ ही आपके फेफड़ो में तरल पदार्थ भी भर जाते हैं.

क्या हंता वायरस है घातक?

हंता वायरस के घातक होने की बात करें तो हां यह वायरस काफी घातक है. क्योंकि इससे चीन में पहली मौत दर्ज की जा चुकी है. इस वायरस के चपेट में आने पर मृत्यु दर 38% है.