काठमांडू: नेपाल में स्वास्थ्य अधिकारियों को कुष्ठ रोग के फिर से सिर उठाने का डर सताने लगा है. 2018 में इसकी प्रसार दर 0.94 पहुंच जाने के बाद अधिकारी चिंतित हैं. काठमांडू पोस्ट की गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 में हिमालय राष्ट्र द्वारा बीमारी को जड़ से खत्म करने की घोषणा के बाद नेपाल को कुष्ठ मुक्त देश का दर्जा दिया गया था. हालांकि अगर प्रसार दर कुल आबादी के एक फीसदी तक पहुंच जाती है तो देश से यह दर्जा छिन सकता है.

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विशेषज्ञ को डर है कि इससे नेपाल में इस बीमारी के पुनरुत्थान का पता चलता है. एक अधिकारी ने कहा कि इसकी दर बढ़ सकती है क्योंकि वर्तमान आकंड़े प्रारंभिक डेटा से लिए गए हैं. समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा विभाग के महामारी विज्ञान एवं रोग नियंत्रण प्रभाग (ईपीसीडी) के कुष्ठ रोग नियंत्रण एवं अक्षमता (एलसीडी) खंड ने कहा कि प्रसार दर 2017 में 0.92 फीसदी और 2016 में 0.89 फीसदी रही थी. चिकित्सक और एलसीडी खंड के प्रमुख रबिंद्र बसकोटा ने कहा कि अगर देश यह दर्जा खोता है तो उसके लिए यह एक तगड़ा झटका होगा.

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उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग की ऊष्मायन अवधि एक से 20 वर्ष तक भिन्न-भिन्न होती है और इसके अधिक से अधिक रोगियों का इलाज कर इसके प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है. उनके मुताबिक, अगर यह चलन जारी रहा तो मात्र दो वर्षो में प्रसार दर एक फीसदी पर पहुंच जाएगी.

कुष्‍ठ रोग के ये हैं लक्षण
छाती पर बड़ा, अजीब से रंग का घाव या निशान.
त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, जो चपटे और फीके रंग के दिखते हैं, इस स्थान पर त्वचा सुन्न पड़ जाती है.
त्वचा में खुश्की, अकड़न और मोटी त्वचा.
पैरों के तलुओं पर ऐसा घाव जिसमें दर्द न हो.
चेहरे या कान के आस-पास गांठें या सूजन, जिसमें दर्द न हो.
भौहें या पलकें गिर जाना.
त्वचा के प्रभावित हिस्सों का सुन्न पड़ जाना.
मांसपेशियों में कमजोरी या पैरालिसिस (खासतौर पर हाथों और पैरों में).
आंखों की समस्याएं, जिनसे अंधापन तक हो सकता है.
पैरालिसिस या हाथों और पैरों का अपंग होना.
पैरों की अंगुलियों का छोटा होना.
नाक का आकार बिगड़ना.

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