नई दिल्ली. गर्भावस्था और जन्म के बाद के 1,000 दिन तक नवजात के शुरुआती जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है. आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों के मस्तिष्क विकास में भारी नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई नहीं हो पाती है. जेपी अस्पताल की न्यूट्रिशियन श्रुति शर्मा का कहना है कि शिशु के शरीर का सही विकास नहीं होना, सीखने की क्षमता में कमी, स्कूल में सही प्रदर्शन नहीं करना, संक्रमण और बीमारी का अधिक खतरा होने जैसी कई अन्य गंभीर समस्याएं होने के पीछे सही पोषण न मिलना ही एकमात्र वजह है. गर्भावस्था और जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, इंसान की जिंदगीभर का स्वास्थ्य उसके पहले 1000 दिन के पोषण पर निर्भर करता है. इस अवधि में उसे मिले पोषण का संबंध उस पर मोटापा और क्रॉनिक बीमारियों से भी है. आज Health Tips में जानते हैं New Born Baby के पोषण के बारे में.Also Read - Weight Loss Tips : वजन कम करने में मददगार हैं यह घरेलू नुस्खे, आज ही अपनाए और मोटापे से छुट्टी पाए | वीडियो देखें

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– नवजात शिशु और बच्चे की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उसे जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाना जरूरी है.

– दो साल की उम्र तक बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग (स्तनपान) जरूर कराएं. यह नवजात शिशु को कई संक्रमणों और बीमारियों से सुरक्षित रखता है.

– स्तनपान कराने से नवजात शिशु के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं. इससे उनका संपूर्ण पोषण होता है और मेटाबॉलिज्म की जरूरतें पूरी होती हैं.

– सही तरीके से मां का दूध पिलाने से बच्चे में मां का प्यार जन्म लेता है और बाद में उसका मानसिक-सामाजिक विकास होता है.

– मां का दूध बच्चे के बेहतर मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार होता है और इससे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है.

Child-Nutrition

6 माह से 1 साल के बच्चे के लिए

– 6 माह से लेकर 18 साल के बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें बदल जाती हैं. अब उसे मां के दूध के अलावा ठोस आहार भी देना चाहिए.

– बच्चे के लिए जरूरी मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स के साथ-साथ प्रोटीन्स, फैट्स, आयरन और कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति होना जरूरी है.

– बच्चा एक साल का होने पर वह परिवार के बाकी लोगों के साथ खाने लगता है. उन्हें मुख्य आहार के बीच ड्राई फ्रूट्स या कच्ची सब्जियां, दही और ब्रेड स्टिक खाने को दें.

– उम्र बढ़ने के साथ बच्चों के आहार में विभिन्न चीजें शामिल करें. ‘परिवार के साथ मिल-बैठ कर खाने’ का सिद्धांत लागू कर दें.

– बच्चों में सही आहार चुनने की आदत डालें. इससे वह अलग-अलग चीजें खाने की हैबिट होगी और उसका सही पोषण हो सकेगा.

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क्या खिलाएं, जानना जरूरी

– प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोतों में सोया उत्पाद, मटर, बीन्स, अंडे हैं. इनके अलावा बच्चे को विभिन्न ताजा फल और ड्राई फ्रूट्स खाने के लिए प्रोत्साहित करें.

– बच्चों को किशमिश, बादाम या काजू जैसे ड्राईफ्रूट्स अच्छे लगते हैं, लेकिन ये चीजें कम खिलाना चाहिए, क्योंकि इनमें कैलोरी अधिक होती है.

– बच्चे को हर सप्ताह विभिन्न प्रकार की सब्जियां खिलाएं जैसे कि हरा, लाल और नारंगी बीन्स और मटर, स्टार्ची और अन्य सब्जियां.

– साबूत गेहूं का बना ब्रेड, ओटमील, पॉपकॉर्न, क्विनोआ या चावल आदि को प्राथमिकता दें, इससे बच्चे के शारीरिक विकास पर पॉजिटिव असर पड़ता है.

– बच्चे को वसा-मुक्त या कम कैलेारी के दुग्ध उत्पाद जैसे दूध, दही, चीज या फोर्टिफाइड सोया पेय पदार्थ लेने के लिए प्रोत्साहित करें.

– बच्चों के दैनिक आहार में आयरन होना जरूरी है ताकि उनके मस्तिष्क का सही विकास हो.

– कैल्सियम हड्डियों और मांसपेशियां के सही विकास के लिए बहुत जरूरी है. यह डेयरी फूड, रागी, रेजिन आदि में पाया जाता है जो आपके बच्चों के आहार में जरूर शामिल करें.

– अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों और सॉफ्ट ड्रिंक्स स्वास्थ्य की गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं. अत्यधिक नमकीन और मसालेदार खाना भी उन्हें नहीं देना चाहिए.