Metabolic Syndrome: चिकित्सा विशेषज्ञों ने मेटाबोलिक सिन्ड्रोम के शिकार पुरुषों को चेताया है कि उन्हें कोविड-19 से विशेष तौर पर सावधान रहते हुए स्वस्थ जीवनशैली और उचित खान-पान अपनाने की जरूरत है क्योंकि संक्रमण के बाद इस श्रेणी के मरीजों में महामारी की जटिलताएं अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आ रही हैं. मेटाबोलिक सिन्ड्रोम के शिकार मरीजों में उच्च रक्तचाप, रक्त में शर्करा का ऊंचा स्तर, कमर पर जमा अतिरिक्त चर्बी और कोलेस्ट्रॉल का असामान्य स्तर जैसे लक्षण होते हैं. Also Read - महामारी विशेषज्ञ का दावा, 2020 में विकसित हो सकता कोरोना वैक्सीन, मगर 2021 के अंत तक इसका उत्पादन संभव

देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल इंदौर का श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सैम्स) इस महामारी के इलाज से जुड़े सबसे व्यस्त अस्पतालों में शुमार है. अस्पताल के छाती रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रवि डोसी अब तक इस महामारी के करीब 1,100 मरीज देख चुके हैं. डोसी ने रविवार को बताया, “कोविड-19 के इन 1,100 मरीजों में शामिल करीब 150 पुरुष ऐसे थे जो मेटाबोलिक सिन्ड्रोम के दायरे में आते हैं. इस सिंड्रोम से जूझ रहे मरीजों के इलाज में अधिक समय लग रहा है क्योंकि संक्रमण के बाद उनमें महामारी की जटिलताएं अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आ रही हैं.” Also Read - Mann Ki Baat : कोविड-19 की लड़ाई को कमजोर नहीं होने दे सकते, जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें

उन्होंने बताया, “यह देखा गया है कि कई पुरुष लॉकडाउन के दौरान अपने घर में रहने के दौरान कसरत और उचित खान-पान का ध्यान नहीं रख रहे हैं जिससे वे मेटाबोलिक सिन्ड्रोम की चपेट में आ सकते हैं. अगर ये लोग कोविड-19 से संक्रमित होते हैं, तो सिंड्रोम के दुष्प्रभावों के कारण महामारी के खिलाफ उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है.” डोसी ने सुझाया कि इन मेडिकल तथ्यों के मद्देनजर खासकर 30 साल से ज्यादा उम्र वाले पुरुषों को ज्यादा वसा वाले भोजन से परहेज करना चाहिये और लॉकडाउन के दौरान अपने घर में ही कसरत करते हुए खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना चाहिये. Also Read - Lockdown5.0 में खुलेंगे स्कूल, कॉलेज! केंद्र सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश, जानें अब क्या हैं नियम

इस बीच, इंदौर के भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम-आई) ने कोविड-19 की जटिलताओं और मेटाबोलिक सिन्ड्रोम के बीच के संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय भागीदारी वाला विस्तृत अनुसंधान शुरू कर दिया है. मध्यप्रदेश में कोविड-19 के प्रकोप पर आधारित अनुसंधान में जुटे छह सदस्यीय दल में आईआईएम-आई के एक सहायक प्रोफेसर के साथ ही अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय और कोलंबिया विश्वविद्यालय के अध्येता शामिल हैं.

अध्ययन दल में शामिल आईआईएम-आई के सहायक प्रोफेसर सायंतन बनर्जी, जैव सांख्यिकी के जानकार भी हैं. बनर्जी ने अध्ययन की शुरूआत में मिले अहम संकेतों के हवाले से बताया, “राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के चौथे दौर (एनएफएचएस-4) के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद हमें पता चला है कि मध्यप्रदेश के ग्रीन जोन के जिलों के मुकाबले रेड और ऑरेंज जोन के जिलों में बसी पुरुष आबादी में न केवल मोटापा बढ़ा हुआ है, बल्कि उनके रक्तचाप का स्तर और रक्त में शर्करा की मात्रा भी ज्यादा है.”

उन्होंने कहा कि चूंकि प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण के बाद दम तोड़ने वाले वाले ज्यादातर पुरुष मरीज उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों से पहले ही जूझ रहे थे. इसलिये मेटाबोलिक सिन्ड्रोम और कोविड-19 की जटिलताओं के बीच के संबंधों का पता लगाने के लिये जारी अध्ययन बेहद अहम है. बनर्जी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि अध्ययन के निष्कर्षों से चिकित्सा समुदाय और सरकारी तंत्र को कोविड-19 के खिलाफ बेहतर रणनीति तय करने में मदद मिलेगी.”