वैसे उम्र के साथ-साथ बालों का पकना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन 35 वर्ष की आयु से पहले बालों का पकना चिंता का विषय हो सकता है। बालों के असमय पकने को रोकने के लिए चाय, कॉंफी का सेवन कम करना चाहिए, एल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए। खाने में ज्यादा खट्टा, अम्लीय भोज्य-पदार्थों का चयन, तेल और तीखे भोजन भी बालों से जुड़ी इस समस्या को और बढा देते हैं। इन सब के अलावा मानसिक तनाव, चिंता, धूम्रपान, दवाओं का लम्बे समय तक उपयोग, अनियंत्रित हार्मोन स्तर, बालों को ब्लीच करना, रंग लगाना आदि से बालों के पकने, झड़ने और दो मुँहे होना का सिलसिला और तेज हो जाता है। चलिए आज जानते हैं कुछ सामान्य से किंतु अतिकारगर पारंपरिक नुस्खों के बारे में जिनका इस्तमाल कर आप भी स्वस्थ बालों के मालिक बन सकते हैं..

– शहद के साथ कद्दुकस अदरख मिला लिया जाए और इसे बालों पर लगाया जाए तो बालों का पकना कम हो जाता है।

– सूखे हुए आँवले के फलों को पानी में डालकर तब तक उबाला जाए जब तक किए एक चौथाई शेष रहे, इसमें मेंहदी और नींबू रस मिला लिया जाए और बालों पर लेपित किया जाए, माना जाता है कि ऐसा करने से असमय बालों का पकना रूक जाता है।

-मेंहदी, मेथी के दानों का चूर्ण, तुलसी की पत्तियों का रस, पुदिना रस और सूखी चाय की पत्तियों को मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाए और इस पेस्ट को बालों पर लगाकर २ घंटों तक रखा जाए और फिर किसी हर्बल शैम्पू से बालों को धो लिया जाए, फायदा करता है।

– गुड़हल के फ़ूल एकत्र कर लिए जाएं और कुचल कर पेस्ट तैयार किया जाए, इस पेस्ट को बालों पर लगाया जाए। यह पेस्ट एक नेचुरल कंडीशनर की तरह कार्य करता है और डेंड्रफ़ भगाने में मदद भी।

-१/२ कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म किया जाए, इसमें ४ ग्राम कर्पूर मिला लिया जाए, जब कर्पूर पूरी तरह से घुल जाए तो इस तेल से मालिश की जानी चाहिए। मालिश सप्ताह में एक बार अवश्य करनी चाहिए, कुछ ही समय में डेंड्रफ़ खत्म हो जाते हैं।

– बालों पर तिल का तेल सप्ताह में कम से कम एक बार अवश्य लगाना चाहिए। तिल का तेल बालों के बेहतर स्वास्थ्य के उत्तम माना जाता है।

– नारियल तेल में थोड़ा सा दही डालकर सिर पर मालिश करनी चाहिए, इससे बालों का दो मुँहापन खत्म हो जाता है और धीरे धीरे बाल सामान्य हो जाते हैं।

–  दही के साथ टमाटर को कुचल लिया जाए और इसमें थोड़ा सा नींबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाया जाए और इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार की जाए तो समस्या का निदान जल्द हो जाता है।

(ये हर्बल टिप्स डॉक्टर डीपक आचार्य जी के हैं।  वे पिछले 18 सालों से भारत के सुदूर वनवासी इलाकों से पारंपरिक हर्बल ज्ञान को संकलित कर आधुनिक विज्ञान की नज़रों से परख रहें हैं। पेशे से वैज्ञानिक डॉ आचार्य ने अब तक 6 किताबें लिखी हैं। हाल ही में उनकी किताब ‘हर्बल जीवन मंत्र’ आई है।)