
Kajal Kumari
पत्रकारिता में 12 साल से ज्यादा का अनुभव. साल 2009 में पीटीएन न्यूज चैनल से कैरियर की शुरुआत. 2011 से 2014 तक DDNews में कॉपी एडिटर, साल 2016 से 2020 ... और पढ़ें
ICRISAT Research Report: कैल्शियम स्वस्थ हड्डियों और दांतों के सेहत से संबंधित होता है और इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. इसके साथ ही कैल्शियम रक्त का थक्का बनाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और हर्ट बीट के साथ ही तंत्रिका कार्यों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए हर दिन पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम का सेवन जरूरी होता है. खासकर महिलाओं और बच्चों को इसकी ज्यादा जरूरत होती है.
कहते हैं सबसे ज्यादा कैल्शियम दूध में होता है
कैल्शियम के स्त्रोत को लेकर आम धारणा है कि दूध में यह सबसे ज्यादा मात्रा में मौजूद होता है और यही कारण है कि आमतौर पर लोग बच्चों के लिए दूध सबसे ज्यादा जरूरी समझते हैं. यह सच है की दूध हेल्दी हड्डियों और दांतों के लिए अच्छा होता है. लेकिन हाल में एक स्टडी में खुलासा हुआ कि कैल्शियम के लिए दूध नहीं बल्कि अब तक जानवरों के चारे के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले तुअर दाल के छिलके ज्यादा होता है.
दूध से ज्यादा कैल्शियम इस दाल के छिलके में
इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) ने कहा है कि अरहर (तुअर) के बीज के छिलके में दूध की तुलना में छह गुना अधिक कैल्शियम होता है, जो इसे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) और रिकेट्स की समस्या के उपचार के लिए खाद्य और दवा को तैयार करने वाली कंपनियों के लिए मूल्यवान बनाता है.
ICRISAT में हुए स्टडी के मुताबिक, तुअर के बीज के छिलके दूध से ज्यादा कैल्शियम की मात्रा मौजूद होती है, जो बेबी फूड और मिनरल्स सप्लीमेंटस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. अभी तक इन बीज के छिलकों को कचरा या जानवरों के चारे के रूप में डिस्पोस्ड किया जाता रहा है.
ICRISAT के जीनबैंक के नेतृत्व में किए गए शोध में पाया गया है कि सिर्फ 100 ग्राम अरहर के बीज के कोट में 652 मिलीग्राम कैल्शियम होता है, जबकि 100 मिलीलीटर दूध में 120 मिलीग्राम ही कैल्शियम होता है.
डॉक्टरों के मुताबिक मानव शरीर को प्रतिदिन 800-1,000 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है, जिसके बारे में रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि ये आहार से पूरा नहीं हो पाता है.
शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, सुन्न होना या झुनझुनी, विशेष रूप से उंगलियों और जबड़े में, बेहोशी, निगलने में कठिनाई जैसी समस्याएं आ सकती हैं. ऐसा कुछ भी लगे तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.
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