नई दिल्ली: सरकार के एक नये प्रस्ताव के मुताबिक अगर एक भी दवा घटिया पाई जाती है तो निर्माता को पूरे बैच के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बराबर का जुर्माना देना पड़ सकता है.

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स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर एक बैच में 1,000 से लेकर एक लाख यूनिट होती हैं. हालांकि, टैबलेट या तरल के रूप में होने वाली दवा के आधार पर बैच का आकार निर्भर करती है. अधिकारी ने बताया कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के अलावा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा प्रस्तावित नया प्रावधान दोषपूर्ण पैकेजिंग पर भी लागू होगा.

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भारत के सर्वोच्च दवा सलाहकार संगठन दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) से इसे मंजूरी मिल गई है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इसे मंजूरी मिलना बाकी है.

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