नई दिल्‍ली: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान यानी IISIR से अच्‍छी खबर आई है. IISIR ने एक निजी कंपनी के साथ मिलकर ऐसा उपकरण बनाया है, जो पानी में आर्सेनिक का पता लगा लेगा. बाद में आर्सेनिक को पानी से निकाल उसे सुरक्षित और उपयोग करने योग्य बना देगा. Also Read - अतिरिक्त टीबी के मरीजों के लिए कहर बनेगा कोरोना, 5 साल में 95 हज़ार मौतों की आशंका

आईआईएसईआर के निदेशक सौरभ पाल ने बताया कि उपकरण का नाम ‘आर्सेनिक सेंसर एंड रिमूवल मीडिया’ रखा गया है. ये एक प्रभावी प्रणाली है, जिसके उत्पादन की लागत भी कम है. Also Read - अगर आप भी जल्दी-जल्दी खाते हैं खाना, तो जान लें इससे होने वाले नुकसानों के बारे में

डॉ राजा षणमुगम की अगुवाई में आईआईएसईआर की अनुसंधान टीम ने प्रमुख रसायनों के निर्माता की प्रयोगशाला में आर्सेनिक सेंसर बनाया है. उन्होंने कहा कि अगर पानी में आर्सेनिक है तो यह सेंसर तुरंत रंग बदल लेगा. Also Read - Summer Tips: गर्मियों का सुपरहीरो कहलाया जाता है सत्तू, सेहत के लिए भी है बेहद फायदेमंद

शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित डॉ टी रामास्वामी ने कहा कि मुख्य रूप से लोग पानी में आर्सेनिक की मौजूदगी के बारे में जानते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि पानी में इसकी मौजूदगी सीमा में है या इससे ज्यादा है. यानी पानी सुरक्षित है या असुरक्षित है.

उन्होंने कहा कि अगर लोगों को पानी में आर्सेनिक की मात्रा का पता लगेगी तो इससे सिर्फ लोगों की चिंता बढ़ेगी. इसलिए ऐसा उपकरण बनाया गया है जो पानी में से आर्सेनिक को निकालकर उसे सुरक्षित बना दे.
(भाषा से इनपुट)