दिन के दौरान घरों के अंदर वायु प्रदूषण बाहर से भी बदतर हो सकता है. यह वैक्यूमिंग, खाना पकाने, धूल झाड़ने या कपड़ों का ड्रायर चलाने जैसे कामों के कारण हो सकता है. एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है. स्टडी के मुताबिक घरों में प्रदूषण का स्तर बाहरी प्रदूषण की तुलना में 10 से 30 गुना अधिक हो सकता है. घरों के अंदर वायु प्रदूषण के नतीजे अस्थमा पीड़ित युवाओं और बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं. शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि प्रत्येक घर में वायु प्रदूषण की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं.Also Read - Greater Noida Most Air Polluted Area in North India: ज़हर हुई ग्रेटर नोएडा की हवा, उत्तर भारत में सबसे अधिक प्रदूषण वाला इलाका बना

हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “वायु प्रदूषण एक साइलेंट किलर है. कुछ घरों में प्रदूषण का स्तर बाहरी प्रदूषण की तुलना में 10 से 30 गुना अधिक हो सकता है. रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों और घरेलू चीजों जैसे पेंट, पालतू जानवरों से एलर्जी और कुकिंग गैस आदि वायु प्रदूषण का अतिरिक्त स्रोत हो सकते हैं. यह मानव शरीर के अधिकांश अंगों और प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं.” Also Read - व्हाइट हाउस से विदाई के बाद पहले भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर क्यों साधा निशाना, कहा...

उन्होंने कहा, “पर्यावरण में मौजूद कणों का सीधा वास्ता फेफड़ों से पड़ता है, जिसके कारण सीओपीडी, अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर जैसे कई श्वसन रोग हो सकते हैं. धूल के कण जैसे प्रदूषक फेफड़ों की सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सेल साइकल डेथ को प्रभावित कर सकते हैं. प्रदूषण की वजह से अस्थमा और सीओपीडी वाले लोगों में परेशानी हो सकती है.” Also Read - Delhi Air Quality News: दिल्ली में और बिगड़ सकती है हवा की सेहत, पहले से ही खराब है स्थिति, तापमान भी बढ़ेगा

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “इनडोर वायु प्रदूषण की समस्या को हल करना इतना आसान भी नहीं है. आदर्श समाधान तो यह है कि सभी खिड़कियों को खोला जाए और इनडोर प्रदूषकों को बाहर निकलने दिया जाए. लेकिन, प्रदूषित शहरों में यह मुश्किल है क्योंकि बाहरी प्रदूषक घर के अंदर आ सकते हैं.”

डॉ. अग्रवाल ने कुछ सुझाव देते हुए कहा, “घर और ऑफिस में नमी को नियंत्रित करें, बाथरूम और रसोई में एगजॉस्ट फैन लगाएं, घरेलू उपकरणों को ठीक से साफ करें और धूल से बचाकर रखें, कालीन को साफ और सूखा रखें, तकिए, कंबल और बिस्तर को नियमित रूप से 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर धोया करें, टेक्सटाइल कारपेटिंग की जगह लकड़ी, टाइल या लिनोलियम का फर्श लगाएं, वैक्यूम क्लीनिंग और गीले पोछे से सफाई करना अच्छा तरीका है. “