नई दिल्ली: भारत में थॉयराइड से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. इन बीमारियों का इलाज संभव नहीं है, लेकिन इन पर नियन्त्रण रखा जा सकता है. थॉयराइड की बीमारी में आयोडीन की कमी से ब्रेन डैमेज तक हो सकता है. Also Read - Iodine For Covid 19: कोरोना के लिए बेहतरीन है आयोडीन का उपयोग, जानें क्या कहती है स्टडी

एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स के टेक्नोलॉजी एंड मेंटर (क्लिनिकल पैथोलोजी) के अध्यक्ष डॉ. अविनाश फड़के ने कहा, ‘हालांकि थॉयराइड पर अनुसंधान किया जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट है कि आनुुवंशिक कारक और बदलती जीवनशैली इसके लिए जिम्मेदार हैं. जिन परिवारों में थॉयराइड की बीमारियों का इतिहास होता है, उनमें इस बीमारी की संभावना अधिक होती है. ऑयोडीन की कमी थॉयराइड की बीमारी का मुख्य कारण है, जिसके कारण ब्रेन डैमेज तक हो सकता है’. Also Read - बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर में है ये कमी, लोगों से कहा- आप भी रखें ख्याल, वरना...

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उन्होंने कहा, ‘आज दुनिया की 86 फीसदी आबादी तक आयोडीन युक्त नमक उपलब्ध है. नियमित जांच के द्वारा इस पर नियन्त्रण रखा जा सकता है. खासतौर पर गर्भावस्था में और 30 की उम्र के बाद थॉयराइड की नियमित जांच करवानी चाहिए’.

भारत में हर 10 में से 1 वयस्क हाइपोथॉयराइडिज्म से पीड़ित है. इसमें थॉयराइड ग्लैंड थॉयराइड हॉर्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाता. इसके लक्षण थकान, पेशियों और जोड़ों में दर्द, वजन बढ़ना, त्वचा सूखना, आवाज में घरघराहट और मासिक धर्म अनियमित होना है.

कैसे करें बचाव
आयोडीन युक्‍त नमक का ही सेवन करें. डॉक्टर इन बीमारियों से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह देते हैं. खासतौर पर उन लोगों को ये बदलाव लाने चाहिए जिनके परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है.

Thyroid problems

नियमित जांच, खूब पानी पीने, संतुलित आहार, नियमित रूप से व्यायाम, धूम्रपान या शराब का सेवन नहीं करने और अपने आप दवा नहीं लेने जैसे सुझाव शामिल हैं.

डॉ. फड़के ने बताया, ‘महिलाओं में हॉर्मोनों का बदलाव आने की संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक होती है. आयोडीन की कमी से यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है. तनाव का असर भी टीएसएच हार्मोन पर पड़ता है. इसलिए महिलाओं को हर साल थॉयराइड ग्लैंड की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए, इससे कोई भी समस्या तुरंत पकड़ में आ जाती है और समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है’.
(एजेंसी से इनपुट)