
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
पसीना स्वस्थ शरीर की निशानी है. यह कई कारणों से जरूरी है, जैसे शरीर का तापमान नियंत्रण, शरीर से थोड़ा वेस्ट निकालना और शरीर को बैलेंस में रखना, लेकिन कुछ लोगों को पसीना नहीं आता है जो आम तौर पर आना चाहिए. वे चिंतित भी हो जाते हैं कि कहीं कुछ गलत तो नहीं है. डॉ. आशीष गौतम (सीनियर डायरेक्टर-जनरल, लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटलए पटपड़गंज, दिल्ली) ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस समस्या को एनहाइड्रोसिस या हाइपोहाइड्रोसिस कहते हैं. यह समस्या पूरी तरह या आंशिक भी हो सकती है. इसकी जांच जरूरी है क्योंकि यह नर्व, स्किन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की चेतावनी हो सकती है.
पसीना कैसे आता है?
शरीर में मुख्य रूप से पसीने की दो तरह की ग्रंथियां होती हैं एक्राइन और एपोक्राइन. एक्राइन ग्रंथियां पूरे शरीर में होती हैं और शरीर का तापमान स्थिर रखने में मदद करती हैं. एपोक्राइन ग्रंथियां मोटे तौर पर आर्मपिट और जांघों में होती हैं और इनसे शरीर का गंध पैदा होता हैं. शरीर के बहुत गर्म हो जाने पर नर्वस सिस्टम एक्राइन ग्रंथियों को पसीना बनाने का संकेत देता है, लेकिन नर्व, स्किन या कुछ अन्य बीमारियों की वजह से पसीना आना रुक सकता है.
किन कारणों से कम पसीना आता है-
कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से कम पसीना आता है. नर्व की समस्याएं जैसे कि पेरिफेरल न्यूरोपैथी, डायबिटीज में नर्व का डैमेज होना या मल्टीपल स्केलेरोसिस की वजह से पसीने की ग्रंथियां बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं. कुछ दवाओं की वजह से भी पसीना कम हो सकता है, जैसे एंटीहिस्टामाइन, एंटीकोलिनर्जिक और बीटा-ब्लॉकर्स आदि. त्वचा की बीमारियों जैसे सोरायसिस या डर्मेटाइटिस की गंभीर समस्या में प्रभावित हिस्से से पसीना आना रुक सकता है.
पसीना कम आने के पीछे हाइपोथायरायडिज्म, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर और डिहाइड्रेशन जैसी शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं, लेकिन पसीना नहीं आना एक बड़ी समस्या है. इससे शरीर की गर्मी बढ़ सकती है. परिणामस्वरूप गर्मी से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं.
कम पसीना आने के लक्षण
मुख्य लक्षण पसीना बहुत कम या बिल्कुल नहीं आना है. कई अन्य लक्षण भी हैं जैसे –
● त्वचा का सूखापन, पपड़ी या खुजली
● गर्मी में रहने या परिश्रम करने पर चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी महसूस होना
● दिल का तेज़ धड़कन या ओवरहीटिंग
● हाथों या पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी
इन लक्षणों का जल्द पता लगने से उचित चिकित्सा जांच हो सकती है और अन्य समस्याएं होने का खतरा कम हो सकता है.
चिकित्सा जांच और निदान
मरीज के एनहाइड्रोसिस का कारण जानने के लिए सबसे पहले पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेने और फिजिकल जांच करने की जरूरत है. डॉक्टर मरीज से उनकी दवाओं, पिछली बीमारियों, अधिक गर्म जगह रहने के बारे में और यह भी पूछ सकते हैं कि क्या परिवार में किसी को न्यूरोलॉजिकल समस्याएं रही हैं. डॉक्टर कुछ जांच की मदद से मरीज की समस्याओं को बेहतर समझ पाएंगे.
थर्मारेगुलेटरी स्वेट टेस्टिंग से यह पता चलता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पसीने की ग्रंथियां कितना सही से काम कर रही हैं.
● स्किन बायोप्सी से पसीने की ग्रंथियों की संरचना का पता चलता है
● खून जांच ताकि डायबिटीज, थायराइड या ऑटोइम्यून की समस्याओं का पता चले
● न्यूरोलॉजिकल टेस्ट जिससे नर्व डैमेज होने का पता लगे
● समय पर पता चल जाए तो समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है। इसका लाभ खास कर उन्हें होगा जिन्हें गर्मी की वजह से बीमारियों का अधिक खतरा होता है।
इलाज –
इलाज समस्या की वजह के अनुसार किया जाता है. समस्या अगर दवा की वजह से है, तो प्रिस्क्रिप्शन में दवा बदलने या एडजस्ट करने से पसीने की समस्या दूर हो सकती है यदि मुख्य समस्या जैसे डायबिटीज या हाइपोथायरायडिज्म का सही से इलाज करें तो पसीने की समस्या दूर हो सकती है. यदि नर्व हमेशा के लिए डैमेज हो गया है, तो सुरक्षा के निम्नलिखित उपाय ज़रूर करें –
● पेयजल/तरल पदार्थ का सेवन करते रहना
● गर्मियों में ठंडक देने वाले कपड़े पहनना या डिवाइस का इस्तेमाल करना
● बाहर गर्मी हो तो अधिक परिश्रम का काम नहीं करना
● टॉपिकल एजेंट का इस्तेमाल करना, जिससे कुछ खास हिस्सों से पसीना आएगा
इस तरह का कोई उपचार डॉक्टर से पूछ कर करें। शरीर को ज्यादा गर्मी और अन्य समस्याओं से बचा कर रखें।
पसीना और आपका स्वास्थ्य-
पसीना शरीर के तापमान पर नियंत्रण, थोड़ी मात्रा में टॉक्सिन की निकासी, इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस और त्वचा की रक्षा करने में मदद करता है. कम पसीना आने से त्वचा का इन्फेक्शन होता है. यह समस्या गर्मी बढ़ने और शारीरिक परिश्रम करने पर अधिक खतरनाक हो सकती है.
कब जरूरी होता है डॉक्टर से सलाह लेना
पसीना नहीं आने और कन्फ्यूजन, बेहोशी या दिल की धड़कन तेज़ होने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. ये हीटस्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है और तुरंत इलाज की ज़रूरत है. यदि किसी व्यक्ति को क्रॉनिक लक्षण हैं लेकिन एक्यूट लक्षण नहीं हैं, फिर भी जांच जरूरी है ताकि उन कारणों का पता चले जिनका इलाज है और इस तरह लंबे समय में आने वाली समस्याओं से बचना मुमकिन है.
सभी को एक समान पसीना नहीं आता
लोगों को अलग-अलग तरह से पसीना आता है. एपिडेमियोलॉजिकल स्टडीज़ से इसका पता चलता है. कुछ लोगों को सहज ही कम पसीना आता है, लेकिन यदि वर्कआउट करने पर या गर्मी में रहने से भी बिल्कुल पसीना नहीं आता है, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है. पसीना कई अन्य बातों पर भी निर्भर करता है जैसे उम्र, मोटापा और लंबे समय तक बीमार रहना. इसका एक उदाहरण शरीर के माध्यम भाग या पेट का मोटापा है, जो भारत में बहुत आम बात है. हर तीन में से एक वयस्क मोटापा से परेशान है (आईसीएमआर, 2023). मोटापे की वजह से शरीर का तापमान नियंत्रण और पसीना निकलना भी बहुत प्रभावित होता है.
आज बच्चों में भी मोटापा बढ़ रहा है. भारत में ही 14.4 मिलियन से अधिक बच्चे इससे प्रभावित हैं (जीबीडी ओबेसिटी कोलैबोरेटर्स, 2017). इस ट्रेंड से युवाओं में पसीने आने का पैटर्न भी बदल सकता है. परिणामस्वरूप वे गर्मी बर्दाश्त करने की क्षमता खो सकते हैं.
पसीना नहीं आता या कम पसीना आता है इस बात को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. यह कई बीमारियों की चेतावनी हो सकती है. इसका इलाज नहीं करने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए टालने के बजाय जल्द सही चिकित्सा जांच, डायग्नोसिस और इलाज कराना बहुत ज़रूरी है. थोड़ा लाइफस्टाइल भी बदलना होगा. यदि किसी बीमारी की वजह से यह समस्या होती है तो उसका इलाज करने से अक्सर पसीना आना नॉर्मल हो जाता है और इससे संपूर्ण स्वास्थ्य भी बेहतर होता है.
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