शादियों में तेजी से बढ़ रहा है IV ड्रिप थेरेपी का ट्रेंड, सेलिब्रिटीज भी कर रहे हैं फॉलो, लेकिन क्या ये वाकई सेफ है? जानें

इन दिनों शादियों में IV ड्रिप का खूब चलन चल रहा है, यहां तक की सेलिब्रिटीज भी इसको खूब फॉलो कर रहे हैं, लेकिन क्या ये वाकई सेफ है, आइए जानते हैं.

Published date india.com Updated: January 24, 2026 2:54 PM IST
शादियों में तेजी से बढ़ रहा है IV ड्रिप थेरेपी का ट्रेंड, सेलिब्रिटीज भी कर रहे हैं फॉलो, लेकिन क्या ये वाकई सेफ है? जानें

IV Drip Therapy : पहले के समय में शादी मतलब अच्छा खाना, बैंड बाजा, डांस और दूल्हा-दुल्हन होता था, लेकिन आज के समय में आए दिन नए ट्रेंड्स आते रहते हैं. ऐसा ही एक ट्रेंड शादियों में खूब देखने को मिल रहा है. इस ट्रेंड का नाम है IV ड्रिप. आप इससे जुड़ी कुछ रील्स भी देखी होंगी, जहां तक सेलिब्रिटीज भी इसे तेजी से फॉलो कर रहे हैं.

शादियों में जहां पहले डेजर्ट टेबल, कॉकटेल बार या फोटो बूथ होते थे, वहां अब IV ड्रिप स्टेशन लग रहे हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये क्या बला है? दरअसल में इस ट्रेंड में मेहमानों को नसों में IV कैनुला लगाकर फ्लूइड्स, विटामिन्स और मिनरल्स दिए जाते हैं, दावा ये भी किया जाता है कि इससे तुरंत एनर्जी मिलती है, स्किन ग्लो करती है, हैंगओवर दूर होता है और पार्टी के बाद रिकवरी तेज हो जाती है. मजे की बात ये है कि इसे ‘मॉडर्न सेल्फ-केयर’ और ‘प्रिमियम वेलनेस’ का नाम दिया जा रहा है, हालांकि डॉक्टर्स इसे लेकर काफी चिंता में हैं.

शादियों में मेहंदी की जगह सच रही हैं IV कैनुला-

पहले के समय में शादियां बेहद सिंपल और सादगी भरी होती थीं, लेकिन आजकल कई हाई-प्रोफाइल शादियों में IV ड्रिप काउंटर को पूल साइड, मेहंदी स्टेज के पास सेट किया जा रहा है. मेहमान डांस के बीच में ‘हाइड्रेशन बूस्ट’ लेते हैं या अगले दिन हैंगओवर क्योर के लिए IV लगवाते हैं. इसका इस्तेमाल लोग खूब मजे से कर रहे हैं, आज जनता तो छोड़िए सेलिब्रिटीज भी इसे खूब फॉलो कर रहे हैं,लेकिन असल में यह एक मेडिकल प्रोसीजर है, जिसे नॉन-मेडिकल सेटिंग में नॉर्मलाइज किया जा रहा है.

कैसे काम करती है IV ड्रिप-

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अब पहल ये जान लेते हैं कि आखिर ये काम कैसे करता है. दरअसल इस दौरान IV ड्रिप में एक छोटी सुई (कैनुला) हाथ की नस में लगाई जाती है, ऊपर लटके बैग में फ्लूइड्स और न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो धीरे-धीरे खून में जाते हैं. लोगों का मानना है कि मुंह से गोली या जूस लेने पर पेट में जाकर काफी हिस्सा वेस्ट हो जाता है, लेकिन IV से लगभग 100% न्यूट्रिएंट्स बॉडी में जाते हैं. इसलिए असर जल्दी और ज्यादा अच्छा दिखता है. एक सेशन आमतौर पर 30 मिनट से 1 घंटे तक चलता है. सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर भी इसे बहुत प्रमोट करते हैं.

IV ड्रिप के फायदे-

तुरंत एनर्जी और हाइड्रेशन: लोगों का मानना है कि इससे थकान, जेटलैग या पार्टी के बाद जल्दी रिफ्रेश महसूस होता है

ग्लोइंग स्किन और एंटी-एजिंग: ग्लूटाथियोन जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स से स्किन ब्राइट और हेल्दी दिखती है.

इम्यूनिटी बूस्ट: विटामिन C, जिंक के चलते रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है

हैंगओवर रिलीफ: शराब के बाद डिहाइड्रेशन और सिरदर्द में राहत मिलती है

वेट लॉस सपोर्ट: मेटाबॉलिज्म बढ़ाने वाले कंपोनेंट्स से एनर्जी मिलती है

पेन और थकान होती है कम: रोज की थकान, मसल पेन या विटामिन कमी में मददगार

IV ड्रिप VS गोली/सप्लीमेंट्स-

अब इसकी तुलना गोली से करके देखते हैं. दरअसल में गोली खाने पर ये पेट में 30-50% ही अब्सॉर्ब होती है, बाकी सब वेस्ट हो जाता है. IV से सीधे ब्लड में जाती है, जिससे ये तेज असर करती है, लेकिन ये हर किसी के लिए सही नहीं है.

क्या है प्रोसीजर ?

  • इसे कोई भी ऐसे नहीं ले सकता है, इसके लिए पहले डॉक्टर आपकी हिस्ट्री चेक करते हैं, साथ ही साथ ब्लड टेस्ट करते हैं
  • व्यक्ति के हिसाब से ड्रिप चुनते हैं
  • 30-60 मिनट में सेशन पूरा
  • हफ्ते में 1 बार, 4-5 हफ्ते तक या डॉक्टर की सलाह पर

IV ड्रिप लेने के बाद इन बातों पर दें ध्यान-

  • ध्यान रहे कि ड्रिप लेने के बाद दिनभर में खूब सारा पानी पिएं
  • 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें
  • अगर कोई दवा चल रही है तो डॉक्टर को बताएं
  • आराम करें, भारी काम न करें

क्या IV ड्रिप सुरक्षित है?

अगर आप इन्हें अच्छे डॉक्टर और क्लीनिक में ले रहे हैं तो ये सुरक्षित हैं, वरना इसमें कई परेशानियां हो सकती हैं-

  • इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, सूजन या ब्रूजिंग की समस्या
  • एलर्जी होने का खतरा
  • बहुत ज्यादा फ्लूइड से सिरदर्द, उल्टी या हार्ट पर दबाव की परेशानी हो सकती है
  • इंफेक्शन की समस्या
  • नसों में जलन या इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

  • जो महिलाएं प्रेग्नेंट हैं या ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं
  • एलर्जी हिस्ट्री वाले लोगों को
  • किडनी की बीमारी वाले लोगों को
  • दिल की बीमारी के मरीजों को
  • ब्लड थिनर दवा लेने वाले
  • हमेशा पहले डॉक्टर से सलाह लें

एक न्यूज पोटर्ल से बात करते हुए डॉ. बृज वल्लभ शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर) ने बताया कि आजकल ये ट्रेंड तेजी से चला है, लेकिन IV थेरेपी खास मेडिकल कंडीशन्स के लिए होती है, जब शरीर मुंह से फ्लूइड्स या न्यूट्रिएंट्स लेने में सक्षम नहीं होता है तब इसका इस्तेमाल किया जाता है. हेल्दी लोगों को बिना क्लिनिकल जरूरत के IV देना केयर और कॉस्मेटिक वेलनेस के बीच की लाइन को धुंधला कर देता है. सामान्य थकान, डिहाइड्रेशन या सिरदर्द को मेडिकल प्रॉब्लम बनाकर प्रमोट किया जा रहा है.

हैंगओवर IV ड्रिप्स में सलाइन, विटामिन्स (जैसे विटामिन C, B कॉम्प्लेक्स), एंटी-नॉजिया या पेन रिलीफ दवाएं मिलाई जाती हैं, दावा है कि ये मिनटों में रिकवरी करती है, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हैंगओवर अल्कोहल टॉक्सिसिटी, डिहाइड्रेशन और बॉडी की नैचुरल रेस्पॉन्स है. रेस्ट, पानी और समय ही सबसे सही तरीके हैं, इनसे निकलने के. IV अल्कोहल को न्यूट्रलाइज नहीं करता, लीवर की प्रोटेक्शन नहीं करता, सिर्फ लक्षणों को अस्थायी रूप से ठीक करता है. इससे लोग और ज्यादा पी सकते हैं, जिससे बॉडी पर ज्यादा स्ट्रेन पड़ता है. ऐसे में इसे बिना डॉक्टर की सलाह के या सस्ते/गंदे क्लिनिक में न लें और इसे ट्राई करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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