नई दिल्ली: अंधापन होने की वजहों के बारे में डॉक्‍टर्स ने बड़ा खुलासा किया है. उन्‍होंने कहा है कि इसमें रेटिना (आंख के पिछले हिस्से) से जुड़ी बीमारियों की प्रमुख भूमिका होती है. Also Read - Coronavirus: सुप्रीम कोर्ट भी लॉकडाउन, वकीलों के चैम्बर हुए बंद, जरूरी मामलों की ही होगी सुनवाई

विशेषज्ञों ने कहा है कि अंधापन होने के कारणों में आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियों की तुलना में रेटिनल बीमारियां ज्यादा परेशानी का सबब बनती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, विभिन्न रेटिनल विकारों में उम्र से जुड़ी मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) और डायबिटिक मैक्यूलर इडिमा (डीएमई) दो ऐसी बीमारियां हैं, जिससे हमेशा के लिए आंखों की रोशनी खोने का डर रहता है. एएमडी और डीएमई को आसानी से मैनेज किया जा सकता है, अगर समय पर बीमारी की पहचान हो जाए. Also Read - कोरोना के इलाज में बिना परीक्षण वाली दवाओं के इस्तेमाल पर WHO जारी की चेतावनी

EYE SIGHT Also Read - एक और खुलासाः अगर आपको भी इस काम में है परेशानी तो हो सकते हैं कोरोना वायरस से संक्रमित

एम्स के पूर्व चिकित्सक एवं सीनियर कंसलटेंट विटरियोरेटिनल सर्जन और ऑल इंडिया कोलेजियम ऑफ ओपथालमोलोजी के प्रेसिडेंट डॉ. राजवर्धन आजाद ने कहा, ‘रेटिनल बीमारियों जैसे कि एएमडी में धुंधला या विकृत या देखते समय आंखों में गहरे रंग के धब्बे दिखना, सीधी दिखने वाली रेखाएं लहराती या तिरछी दिखना लक्षण है. आमतौर पर रेटिनल बीमारियों की पहचान नहीं हो पाती क्योंकि इसके लक्षणों से दर्द नहीं होता और एक आंख दूसरी खराब आंख की क्षतिपूर्ति करती रहती है. जब एक आंख की रोशनी बहुत ज्यादा चली जाती है और एक आंख बंद करके देखते हैं तो पता चलता है. इसलिए इसके लक्षणों को समझना जरूरी है और इसकी पहचान कर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए ताकि आंखों की रोशनी को बचाया जा सके.’

eye disease

बता दें कि एएमडी बुजुर्गो को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. यह दुनिया में 8.7 फीसदी दृष्टिहीनता के लिए जिम्मेदार है. डायबिटिक रेटिनोपैथी आंखों के पीछे रेटिना में मौजूद ब्लड वेसेल्स को क्षतिग्रस्त करता है. इस बीमारी के कारण विश्व के 4.8 फीसदी लोग दृष्टिहीन हैं।
(एजेंसी से इनपुट)