नई दिल्ली: गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित योहेई सासाकावा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम को स्वच्छ भारत अभियान की तरह ‘व्यापक’ बनाया जाए और इससे जुड़ी सोच को बदलने के लिए इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार विश्व में कुष्ठ रोग के नए मामलों की सर्वाधिक वार्षिक संख्या में भारत पहले नंबर पर है. उसके बाद ब्राजील और इंडोनेशिया का नाम आता है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में 2016 में 1,35,485 नए मामले सामने आए जो वैश्विक स्तर पर कुल 2,14,783 नए मामलों का 63 प्रतिशत हैं. कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए डब्ल्यूएचओ के सद्भावना दूत सासाकावा ने कहा कि कुष्ठ रोगियों को स्वस्थ हो जाने के बाद भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

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पीएम मोदी से करेंगे ये अपील
सासाकावा ने ‘पीटीआई भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि 15 साल पहले तक कुष्ठ रोग उन्मूलन पर ध्यान केंद्रित था और अब एक नई समस्या सामने आ गई है कि कुष्ठ रोग पीड़ितों को स्वस्थ हो जाने के बाद भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है. समाज के लोग उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. खासकर भारत में कुष्ठ रोग के खिलाफ योगदान के लिए गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किए गए 80 वर्षीय सासाकावा ने कहा कि मैं अवसर मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अवश्य मुलाकात करूंगा और उनसे स्वच्छ भारत अभियान की तरह ही कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम को व्यापक बनाने की अपील करूंगा ताकि उस पर भी ध्यान केंद्रित किया जाए. स्कूल पाठ्यक्रम में भी इससे जुड़े अध्याय शामिल किए जाने चाहिए ताकि इस रोग के बारे में लोगों की सोच बदली जा सके.

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बच्चे ही बदल सकते हैं कुष्ठ रोग से जुड़ी सोच
उन्होंने कहा कि देश में केवल बच्चे ही कुष्ठ रोग से जुड़ी सोच को बदल सकते हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या वह चाहते हैं कि भारत सरकार कुष्ठ रोग संबंधी कार्यक्रमों के लिए बजट आवंटन बढ़ाए, सासाकावा ने कहा कि वह उसके रुख से काफी संतुष्ट हैं लेकिन राज्य सरकारों को अपने प्रयास तेज करने चाहिए.

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