लंदन: कई लोग एक्‍सरसाइज, डाइटिंग, योगा सब करते हैं पर उनका वजन कम नहीं होता. ऐसा अक्‍सर अनुवांशिक कारणों से होता है. अब इस तरह के लोगों के लिए रोशनी की किरण बनी है एक स्‍टडी.Also Read - Health Benefits Of Avocado: एवोकाडो के इन बेहतरीन फायदों के बारे में जानकर दंग रह जायेंगे आप, आज ही ट्राय करें | वीडियो देखें

इस स्‍टडी में अनुवांशिक मोटापे को कम करने संबंधी उपाय सुझाए गए हैं. बताया गया है कि इसके लिए इंजेक्शन वाली दवा इस्‍तेमाल हो रही है. ये दवा व्यापक रूप से ब्‍लड शुगर को कम करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है. जो मोटापे से लड़ने में मदद कर सकती है. Also Read - Omicron Variant: कितना खतरनाक है ओमिक्रोन वेरिएंट, क्या हैं इसके लक्षण? जानिए सबकुछ एक्सपर्ट की ज़ुबानी | Watch

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शोध में पाया गया कि ऐसे लोगों में मोटापा बचपन की शुरुआत से विकसित होना शुरू हो जाता है. उनमें ऐसा आनुवांशिक रूप से होता है. शोध में कहा गया है कि ऐसा मोटापा किसी व्यक्ति के भूख से संबंधित एक जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है. इसे मोनोजेनिक मोटापा भी कहते हैं. ऐसे लोगों को भूख बहुत ज्यादा लगती है और उनकी भूख खत्म नहीं होती.

शोधकर्ताओं ने पाया है कि लोगों के इस समूह में मोटापे को एक दवा-लिराग्लुटाइड की मदद से कम किया जा सकता है. लिराग्लुटाइड भूख को रोकने वाले हार्मोन जीएलपी-1 का एक परिवर्तित रूप है. ये हार्मोन हमारे खाने के दौरान हमारी इंटेस्टाइन (आंत) से स्रावित होता है.

शोध डेनमार्क के कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में किया गया. वहां के सहायक प्रोफेसर सिगने सोरेनसन टोरेकोव ने कहा, ‘भूख को रोकने वाली दवा लिराग्लुटाइड का इस पर सकारात्मक प्रभाव है. इस दवा के कारण लोग कम भूख महसूस करते हैं और चार महीने के भीतर अपने शरीर के वजन का छह फीसदी तक घटा लेते हैं’.

इस शोध का प्रकाशन पत्रिका ‘सेल मेटाबोलिज्म’ में किया गया है. इसमें शोधकर्ताओं ने एमसी4आर जीन और उत्परिवर्तन की वजह से मोटापे वाले व बिना उत्परिवर्तन वाले एक छोटे समूह का परीक्षण किया था.
(एजेंसी से इनपुट)