मानसून सीजन में कीचड़ से सने रास्तों, पानी से लबालब गलियों और सीलन में पैरों को काफी झेलना पड़ता है. जूतों के चिपचिपे होने के कारण पैरों में दाद, खाज, खुजली तथा लाल निशान पड़ जाते हैं. ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन के मुताबिक मानसून के सीजन में पैरों के देखभाल की बहुत जरूरी है. आप कुछ साधारण सावधानियों और आयुर्वेदिक उपाय से पांव तथा उंगलियों के इंफेक्शन से होने वाले रोगों से बच सकते हैं.Also Read - Industrial Production: भारत का अगस्त में औद्योगिक उत्पादन सालाना आधार पर 11.9 फीसदी बढ़ा

मानसून के मौसम में अत्याधिक नमी और पसीने की समस्या आम देखने में मिलती है. इस मौसम में पैरों के इर्द-गिर्द इंफेक्शन पैदा होता है, जिससे दुर्गंध पैदा होती है. हर्बल क्वीन के नाम से मशहूर शहनाज ने कहा कि पसीने के साथ निकलने वाले फ्लूड को रोज धोकर साफ करना जरूरी होता है, ताकि दुर्गंध को रोका जा सके और पैर ताजगी तथा स्वच्छता का एहसास कर सकें. Also Read - MP weather News Alert: मध्‍य प्रदेश से मानसून की कब होगी विदाई, मौसम विभाग ने दी ये जानकारी

उन्होंने कहा कि सुबह नहाते समय पैरों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए. पैरों को धोने के बाद उन्हें अच्छी तरह सूखने दें तथा उसके बाद पैरों की उंगलियों के बीच टैलकम पाउडर का छिड़काव करें. शहनाज ने कहा कि अगर आप बंद जूते पहनते हैं तो जूतों के अंदर टेलकम पाउडर का छिड़काव कीजिए. बरसात के मौसम के दौरान स्लिपर तथा खुले सैंडल पहनना ज्यादा उपयोगी होता है, क्योंकि इससे पांवों में हवा लगती रहती है तथा पसीने को सूखने में भी मदद मिलती है, लेकिन खुले फुटवियर की वजह से पैरों पर गंदगी तथा धूल जम जाती है, जिससे पांवों की स्वच्छता पर असर पड़ता है. Also Read - Delhi Weather Forecast: दिल्ली में अगले 2-3 दिन बारिश की है संभावना, मॉनसून रीट्रीट में होगी देरी

शहनाज ने कहा कि दिनभर की थकान के बाद घर पहुंचने पर ठंडे पानी में थोड़ा सा नमक डालकर पांवों को अच्छी तरह भिगोइए तथा उसके बाद पांवों को खुले स्थान में सूखने दीजिए. बरसात के गर्म तथा नमी भरे मौसम में पांवों की गीली त्वचा की वजह से ‘एथलीट फुट’ नामक बीमारी पांवों को घेर लेती है. उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक तौर पर इसकी उपेक्षा हो तो यह पांवों में दाद, खाज, खुजली जैसी गंभीर परेशानियों का कारण बन जाती है. यह बीमारी फंगस इंफेक्शन की वजह से पैदा होती है. इसलिए अगर उंगलियों में तेज खारिश पैदा हो रही हो, तो तत्काल त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लीजिए.

मानसून में पांवों की देखभाल के लिए घरेलू उपचार :

फुट सोक : बाल्टी में एक चौथाई गर्म पानी, आधा कप खुरखुरा नमक, दस बूंदे नीबू रस या संतरे का सुंगधित तेल डालिए. यदि आपके पांव में ज्यादा पसीना निकलता है तो कुछ बूंदें टी-ऑयल को मिला लीजिए, क्योंकि इसमें रोगाणु रोधक तत्व मौजूद होते हैं तथा यह पांव की बदबू को दूर करने में मदद करती है. इस मिश्रण में 10-15 मिनट तक पांवों को भिगोकर बाद में सुखा लीजिए.

फुट लोशन : 3 चम्मच गुलाब जल, 2 चम्मच नींबू जूस तथा एक चम्मच शुद्ध ग्लिसरीन का मिश्रण तैयार करके इसे पांव पर आधा घंटा तक लगाने के बाद पांव को ताजे साफ पानी से धोने के बाद सुखा लीजिए.

ड्राइनेस फुट केयर : एक बाल्टी के चौथाई हिस्से तक ठंडा पानी भरिए तथा इस पानी में दो चम्मच शहद एक चम्मच हर्बल शैम्पू, एक चम्मच बादाम तेल मिलाकर इस मिश्रण में 20 मिनट तक पांव भिगोइए तथा बाद में पांव को ताजे स्वच्छ पानी से धोकर सुखा लीजिए.

कुलिंग मसाज आयल : 100 मिली लीटर जैतून तेल, 2 बूंद नीलगरी तेल, 2 चम्मच रोजमेरी तेल, 3 चम्मच खस या गुलाब का तेल मिलाकर इस मिश्रण को एयरटाइट गिलास जार में डाल लीजिए. इस मिश्रण को प्रतिदिन पांव की मसाज में प्रयोग कीजिए. इससे पांवों को ठंडक मिलेगी और यह त्वचा को सुरक्षा प्रदान करके इसे स्वस्थ्य रखेगा.