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कैंसर रहित ट्यूमर की अनदेखी के भुगतने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम

इलाज न करवाना आंतरिक कान में बहरेपन का कारण भी बन सकता है क्योंकि हीयरिंग और बैलेंस नर्व एक साथ चलती है: एग्रिम इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरो साइंसेज

Published: August 4, 2018, 5:54 PM IST

नई दिल्ली: अमूमन नॉन कैंसर ट्यूमर या नॉन-मेलिग्नेंट ट्यूमर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है. जो न तो आस-पास के ऊतकों को प्रभावित करती है और न ही फैलती है लेकिन कई बार इसकी अनदेखी करना और समय से इलाज न कराना, गंभीर परिणाम की ओर ले जाता है. जबकि इलाज से आमतौर पर इसके ठीक होने की पूरी संभावना होती है. इसका इलाज भी अब बेहद आसान है.

इलाज न कराने से बहरेपन का हो सकते हैं शिकार

डॉक्टरों की राय है कि ऐसे ट्यूमर का इलाज न कराने पर यह गंभीर नतीजे का कारण बन सकता है. आर्टेमिस अस्पताल के एग्रिम इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरो साइंसेज के न्यूरोसर्जरी एंड साइबरनाइफ सेंटर के निदेशक डॉ. आदित्य गुप्ता के मुताबिक, कैंसर रहित ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं जैसे कि एडेमोना, श्वान्नोमा इत्यादि. उन्होंने कहा कि एडेमोना सबसे आम प्रकार का नॉन कैंसरस ट्यूमर है जो ग्रंथियों की पतली ऊपरी परत से उत्पन्न हो सकता है. ऐसे ट्यूमर बनने के लिए सबसे कॉमन अंग हैं लीवर, पिट्यूटरी ग्लैंड्स, थायराइड ग्लैंड्स, कोलन व गर्भाशय.

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उन्होंने बताया कि श्वान्नोमा जो कि ऊतक नॉन-मेलिग्नेंट ट्यूमर होते हैं जो तंत्रिकाओं को कवर करते हैं, जिन्हें नर्व शीथ कहा जाता है. यह ट्यूमर एक प्रकार की कोशिका से विकसित होते हैं जिसे श्वान कोशिका कहा जाता है. यह आंतरिक कान में बहरापन का कारण बन सकता है क्योंकि हीयरिंग और बैलेंस नर्व एक साथ चलती है.

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डॉ. गुप्ता ने कहा कि मेलेनोमा त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है. यह कैंसर ग्रोथ तब विकसित होती है जब त्वचा कोशिकाओं की ठीक नहीं होने वाली डीएनए क्षति (अक्सर धूप या टैनिंग बेड्स से पराबैंगनी विकिरण के कारण) आनुवांशिक दोष पैदा करती है, जो त्वचा कोशिकाओं को तेजी से द्विगुणित होने और मेलिग्नेंट ट्यूमर बनाने के लिए प्रेरित करती है. मेलेनोमा अक्सर मस्सा जैसा दिखता है, कुछ मस्सा से विकसित होते हैं. यह खास तौर पर उन लोगों में होता है जो आनुवांशिक रूप से रोग के प्रति संवदेनशील होते हैं.

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नॉन इंवेसिव रेडियेशन थेरेपी है सबसे उन्नत उपाय

डॉ. गुप्ता ने कहा, “साइबरनाइफ रेडियेशन सर्जरी सबसे उन्नत, नॉन इंवेसिव रेडियेशन थेरेपी उपाय है, जिससे अधिक डोज वाले रेडियेशन की सटीक बीम की सहायता से कैंसरजन्य के साथ-साथ कैंसर रहित ट्यूमर का इलाज किया जाता है. नॉन-इंवेसिव होने के कारण, इसमें एनीस्थीसिया की जरूरत नहीं पड़ती है और न ही खून निकलता है. ( इनपुट एजेंसी )

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