सिडनी: मोटापे का असर दिल की धड़कन पर सीधे तौर पर पड़ता है. अगर मोटापे पर काबू पाया जाए तो इससे अनियमित धड़कनों को कंट्रोल किया जा सकता है.Also Read - Omicron Scare: ओमिक्रोन वेरिएंट के खतरे से बचाएं अपने बच्चों को, वीडियो में जानिए कैसे रखे उन्हें सुरक्षित |Watch

एक शोध में कहा गया है कि अगर मोटापे की समस्या वाले लोग अगर अपने वजन में कमी लाएं तो दिल की धड़कन को अनियमित होने और उससे उत्पन्न विकार में कमी ला सकते हैं. Also Read - New Corona Variant Omicron: इससे लड़ना है या डरना है? सुनिए expert ने क्या कहा | Watch Video

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शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि 10 फीसदी वजन घटाने के साथ जोखिम कारकों से जुड़े प्रबंधन से एट्रियल फाइब्रिलेशन (एएफ) के प्रभाव में कमी आ सकती है. यह स्ट्रोक के प्रमुख कारक में से है, जिससे मोटापाग्रस्त लोगों में हर्ट फेल्योर हो सकता है.

ये शोध ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड विश्वविद्यालय ने किया है. प्रमुख शोधकर्ता मिलिसा मिडेलडोर्प ने कहा, ‘यह पहली बार है कि ऐसे साक्ष्य पाए गए हैं कि मोटापाग्रस्त लोग जो एट्रियल फाइब्रिलेशन से पीड़ित हैं, वजन कम करके व जीवनशैली में सुधार लाकर इस बीमारी का इलाज खुद कर सकते हैं’.

एएफ एक क्रमिक बढ़ने वाली बीमारी है, जिसमें शुरुआती कमी, स्थितियों के साथ लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं. मोटापा व जीवनशैली से जुड़े कारक इसकी बढ़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं.
(एजेंसी से इनपुट)