नई दिल्ली: क्रोनिक ओब्सट्रेक्टिव पुल्मनेरी डिजीज (सीओपीडी) के कई रोगियों को दिल से जुड़ी बीमारियां हो रही हैं. एक नए अध्ययन में ये बात सामने आई है.Also Read - Omicron Scare: ओमिक्रोन वेरिएंट के खतरे से बचाएं अपने बच्चों को, वीडियो में जानिए कैसे रखे उन्हें सुरक्षित |Watch

आमतौर पर सीओपीडी को फेफड़ों से जुड़ी लंबे समय तक चलने वाली बीमारी माना जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ और शरीर में हवा का प्रवाह प्रभावित होता है. इससे कोर्डियोवास्कुलर डिजीज (सीवीडी) जैसी बीमारियों होने का रिस्क बढ़ जाता है. ऐसे में रोगी के विकलांग होने के साथ मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है. Also Read - New Corona Variant Omicron: इससे लड़ना है या डरना है? सुनिए expert ने क्या कहा | Watch Video

शोध में कहा गया है कि सीओपीडी ग्रस्त लोगों में सांस की नलियों में ब्लॉकेज होने या कम लचीले होने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और यह उनमें बहुत आम समस्या है. इससे सीओपीडी के लक्षण खासतौर से सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर समस्याएं ज्यादा हो जाती है. इसे मेडिकल भाषा में लंग हाइपरइंफ्लेशन कहते हैं और इससे दिल के काम करने की क्षमता भी जुड़ी होती है. Also Read - Omicron Variant: भारत में बरपा ओमिक्रोन वेरिएंट का कहर, जानिए इससे बचने का तरीका और कैसे इसे फैलने से रोका जाए | Expert Advice

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हाल ही में हुए एक अध्ययन ने पहली बार हृदय की कार्यक्षमता और लंग हाइपरइंफ्लेशन के ब्रोनकोडायलेशन के दोहरे प्रभाव की जांच की गई है. लैंसेट रिस्पाइरेटरी मेडिसन में प्रकाशित क्लेम अध्ययन में पाया गया है कि लंग हाइपरइंफ्लेशन से पीड़ित सीओपीडी रोगियों का दोहरे ब्रोनकोडायलेटर के साथ उपचार करने से दिल और फेफड़ों की कार्यक्षमता में काफी सुधार होता है.

बता दें कि दुनियाभर में सीओपीडी से करीब 21 करोड़ लोग प्रभावित हैं और यह मृत्यु का चौथा कारण बनी हुई है. दुनियाभर में सीओपीडी से जितनी मृत्यु होती है, उसमें से एक चौथाई हिस्सा भारत का है. साल 2016 में सीओपीडी के 2 करोड़ 22 लाख रोगी थे. यह बीमारी समय के साथ गंभीर होती जाती है और कई बार यह जानलेवा तक हो सकती है.

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मेट्रो अस्पताल के पुल्मोनोलॉजी व स्लीप मेडिसन विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक तलवार ने कहा, ‘सीओपीडी रोगियों में कार्डियोवास्कुलर बीमारियों के कारण कई प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलते हैं. कई बार उन्‍हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, सभी कारणों और सीवीडी मृत्युदर का खतरा बढ़ जाता है. सीओपीडी ग्रस्त रोगियों में आमतौर पर इस्केमिक हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्यर, कार्डियेक अररिथमिया जैसी सीवीडी की बीमारियां देखने को मिलती हैं’.
(एजेंसी से इनपुट)